राजनीतिक खींचतान का खामियाजा भुगत रहा अहीरवाल, विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित होने का आरोप
रेवाड़ी, 7 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पिछले दो महीनों में हुए तीन रेवाड़ी दौरों से केंद्रीय राज्यमंत्री एवं गुरुग्राम सांसद राव इन्द्रजीत सिंह की लगातार दूरी भाजपा के भीतर जारी राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है।
विद्रोही ने रविवार को जारी बयान में कहा कि रेवाड़ी के रामपुरा के स्थायी निवासी होने के बावजूद राव इन्द्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया। उनके अनुसार यह कोई नई स्थिति नहीं है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के कार्यकाल से लेकर नायब सिंह सैनी के नेतृत्व तक राव इन्द्रजीत सिंह की प्रदेश भाजपा नेतृत्व के साथ राजनीतिक खींचतान जारी रही है।
उन्होंने कहा कि राव इन्द्रजीत सिंह जनवरी 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। आरोप लगाया कि छह बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित होकर राजनीतिक रिकॉर्ड बनाने के बावजूद उन्हें भाजपा में अपेक्षित राजनीतिक सम्मान और हैसियत नहीं मिली। उनके मुकाबले कई कनिष्ठ नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि राव लंबे समय से राज्यमंत्री बने हुए हैं।
टिकट और राजनीतिक उत्तराधिकार की चिंता
विद्रोही ने दावा किया कि 75 वर्ष की आयु पार कर चुके राव इन्द्रजीत सिंह के सामने अब दोहरा राजनीतिक संकट है। एक ओर वे सम्मानजनक ढंग से सक्रिय राजनीति से अलग होने का रास्ता तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी पुत्री आरती राव की राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की राजनीतिक रणनीति के कारण राव अपने इस उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रहे हैं। इसी कारण वे समय-समय पर बागी तेवर दिखाकर भाजपा के केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का प्रयास करते हैं।
विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
विद्रोही ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व और राव इन्द्रजीत सिंह के बीच करीब 12 वर्षों से चल रहे शह-मात के खेल का सबसे अधिक नुकसान अहीरवाल को उठाना पड़ रहा है। अनेक विकास परियोजनाएं पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण या तो शुरू नहीं हो सकीं अथवा आठ-दस वर्षों से अधूरी पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि यह राजनीतिक संघर्ष कुर्सी और वर्चस्व के स्थान पर अहीरवाल के विकास तथा सरकारी संसाधनों में क्षेत्र की उचित हिस्सेदारी के लिए लड़ा जाता, तो इससे राव इन्द्रजीत सिंह और क्षेत्र—दोनों को लाभ मिलता।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व राव इन्द्रजीत सिंह की राजनीतिक कमजोरियों का लाभ उठाकर अहीरवाल में अपनी पकड़ मजबूत करने तथा उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर करने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहा है।








