*समय पर जांच और उपचार के साथ टीबी मरीजों को सामाजिक सहयोग देना जरूरी : सुमित कुमार*
*96 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित, अधिकारियों ने ली टीबी उन्मूलन की शपथ*

गुरुग्राम, 7 सितंबर- टीबी मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का रूप देने और जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से सोमवार को लघु सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में जिला टीबी फोरम एवं अंतरविभागीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सीईओ जिला परिषद सुमित कुमार ने की। इस दौरान जिले में टीबी उन्मूलन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों और प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने टीबी उन्मूलन की शपथ लेकर जिले को टीबी मुक्त बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।
सुमित कुमार ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं और आमजन की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा उपचार ले रहे मरीजों का नियमित फॉलोअप भी किया जाए।
बैठक में बताया गया कि जनवरी से अगस्त 2026 तक गुरुग्राम में कुल 9,634 टीबी मरीजों की अधिसूचना दर्ज की गई, जो निर्धारित 8,000 के लक्ष्य का 120 प्रतिशत है। सरकारी क्षेत्र में 2,723 मरीजों की अधिसूचना हुई, जबकि निजी क्षेत्र में 6,911 मरीजों की अधिसूचना दर्ज की गई। बैठक में टीबी मरीजों को गोद लेने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई। जिले में 6,480 मरीजों में से 3,626 मरीजों ने गोद लेने के लिए सहमति दी, जो 56 प्रतिशत है। इनमें से 958 मरीजों को गोद लिया जा चुका है, जो 26 प्रतिशत है। वहीं उपचार के मामले में जिले की सफलता दर 87 प्रतिशत दर्ज की गई।
जिले में 96 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इनमें 71 ग्राम पंचायतों को कांस्य, 24 को रजत तथा एक ग्राम पंचायत को स्वर्ण श्रेणी प्राप्त हुई है। सीईओ सुमित कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संभावित मरीजों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
सीईओ जिला परिषद ने कहा कि टीबी के लक्षणों को छिपाने के बजाय समय पर जांच करवानी चाहिए। शुरुआती पहचान और पूरा उपचार मरीज को स्वस्थ करने के साथ-साथ संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में टीबी के लक्षणों, जांच, उपचार और उपलब्ध सरकारी सुविधाओं के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर सीईओ जिला परिषद सुमित कुमार ने स्वयं दो टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार एवं पोषण संबंधी जरूरतों में सहयोग देने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि निक्षय मित्र पहल के माध्यम से समाज के सक्षम लोगों और संस्थाओं को टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। इससे मरीजों का मनोबल बढ़ेगा और वे उपचार को बीच में छोड़े बिना पूरा कर सकेंगे।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, औद्योगिक संस्थानों, व्यापारिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, आरडब्ल्यूए, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को निक्षय मित्र पहल से जोड़ा जाए। जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों से ही गुरुग्राम को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बैठक में टीबी मरीजों की पहचान, जांच एवं उपचार, निक्षय मित्र पंजीकरण, पोषण सहायता, मरीजों के फॉलोअप तथा जनभागीदारी सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सीईओ जिला परिषद ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए टीबी उन्मूलन अभियान को गति दें।
इस अवसर पर उप सिविल सर्जन (टीबी) डॉ. रंजना मल्होत्रा, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट डॉ. कृतिका, जिला पीपीएम समन्वयक पूनम, जिला कार्यक्रम समन्वयक मनीषा, एलडीएम गुरुग्राम विनोद बजाज, केमिस्ट एसोसिएशन गुरुग्राम के प्रधान शरद मल्होत्रा, जिला परिषद के परियोजना अधिकारी आर्यन तथा जीएलआरए से डॉ. दिनेश सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।








