शिक्षा में भौतिकता के साथ आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश अनिवार्य

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ओआरसी में राष्ट्रीय शिक्षाविद सम्मेलन शुरू

शिक्षक दिवस पर ब्रह्माकुमारीज़ के ‘ओम शांति रिट्रीट सेंटर’ में जुटे शिक्षाविद

एआई (AI) और सोशल मीडिया के दौर में मानवीय संवेदनाओं और मस्तिष्क के व्यायाम पर दिया गया बल

गुरुग्राम, 5 सितम्बर 2026 – ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के भोरा कलां स्थित ‘ओम शांति रिट्रीट सेंटर’ (ORC) में शिक्षक दिवस के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षाविद सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। द पॉवर ऑफ नाउ विषय पर आयोजित सम्मेलन में देश के विभिन्न ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा शिक्षाविद सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान शिक्षा प्रणाली में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिक चेतना और आधुनिक तकनीकों के संतुलन पर विचार-मंथन करना रहा।

संस्कार आधारित शिक्षा ही स्वस्थ समाज का आधार – राजयोगिनी आशा दीदी

सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि वर्तमान समय ही परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली क्षण है। समय बीत जाने पर सुधार का अवसर हाथ से निकल जाता है और केवल पश्चाताप शेष रह जाता है। उन्होंने बल दिया कि विद्यार्थियों को बाल्यावस्था से ही शांति और योग का महत्व समझाना आवश्यक है। शिक्षा में आध्यात्मिक मूल्यों के समावेश से ही मानसिक रूप से स्वस्थ और सुसंस्कृत समाज की नींव रखी जा सकती है।

तकनीकी शिक्षा की सीमाओं पर प्रकाश डालते हुए हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.जे. राव ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल भौतिक समृद्धि पर केंद्रित है, जबकि शिक्षा का वास्तविक ध्येय व्यक्ति का आंतरिक और आध्यात्मिक विकास करना है। भारत संपूर्ण विश्व में आध्यात्मिक चेतना का संवाहक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर अनुभव से प्राप्त होती है।

MDI गुरुग्राम के निदेशक प्रो. अरविंद सहाय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि AI के अत्यधिक उपयोग से छात्रों के मस्तिष्क का स्वाभाविक विकास थम रहा है। सीखने की प्रक्रिया को जीवंत रखने के लिए मानसिक व्यायाम अत्यंत आवश्यक है।

IILM विश्वविद्यालय (ग्रेटर नोएडा) में स्कूल ऑफ कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के निदेशक डॉ. ए. वडिवेल ने कहा कि आज का युवा अकेलेपन और मानसिक तनाव के कारण सोशल मीडिया के जाल में उलझ कर मानवीय संवेदनाओं से कट रहा है। ऐसे दौर में शिक्षकों की शांत और सकारात्मक मनःस्थिति ही विद्यार्थियों में विश्वास और समानुभूति (Empathy) का संचार कर सकती है।

जीडी गोयनका विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राज सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि अपने व्यक्तित्व और जीवनशैली से विद्यार्थियों को प्रेरित करता है। वहीं एमिटी विश्वविद्यालय के निदेशक संजय झा ने कहा कि मूल्य केवल पढ़ाने की विषय-वस्तु नहीं हैं, बल्कि उन्हें जीवन में जीना पड़ता है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान मनुष्य को एक आदर्श मानव बनाने और शिक्षा को मुक्ति का माध्यम बनाने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

इग्नू के सहायक क्षेत्रीय निदेशक प्रो. कमलेश मीणा ने कहा कि 21वीं सदी में शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम है, लेकिन मूल्यविहीन शिक्षा सामाजिक संकट खड़े कर रही है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान पिछले कई दशकों से भारतीय सनातन संस्कृति और नैतिक चेतना को पुनः स्थापित करने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान सिरसा से पधारीं राजयोगिनी बिंदु दीदी ने उपस्थित शिक्षाविदों को गहन राजयोग ध्यान की अनुभूति कराई, जिससे पूरा वातावरण शांति और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। माउंट आबू से आईं संस्थान के शिक्षा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके सुमन ने प्रभाग द्वारा देशभर में चलाई जा रही शैक्षणिक व नैतिक योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन बीके दिव्या द्वारा किया गया।

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Author: Bharat Sarathi

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