वानप्रस्थ क्लब में शिक्षक दिवस और जन्माष्टमी उत्सव की धूम

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शिक्षकों का सम्मान, खेलों ने दिलाई विद्यालयी जीवन की याद; भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीज़न क्लब में शिक्षक दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षकों को तिलक लगाकर तथा उपहार स्वरूप पेन भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुआ। सुनीता बहल और कौशल जैन ने शिक्षकों एवं सदस्यों का तिलक लगाकर स्वागत किया।

क्लब के महासचिव डॉ. जे.के. डांग ने कहा कि शिक्षक दिवस गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। शिक्षक शिक्षा देने के साथ व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हुए उसे सही दिशा, संस्कार और विवेक प्रदान करते हैं। वानप्रस्थ के सदस्य भी अपने अनुभव एवं ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाकर सीखने-सिखाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए डॉ. डांग ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, कर्म, सत्य और विवेक के प्रतीक हैं। उनका निष्काम कर्म का संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सभी से श्रीकृष्ण के आदर्श अपनाकर प्रेम, सद्भाव और मानव सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

खेल में जीवंत हुए कक्षा के रोचक प्रसंग

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सुनीता श्योकंद और वीना अग्रवाल ने किया। डॉ. श्योकंद द्वारा आयोजित ‘पासिंग द पार्सल’ खेल विशेष आकर्षण रहा। संगीत रुकने पर पार्सल थामे सदस्य ने शिक्षक अथवा विद्यार्थी से जुड़ा अभिनय, संवाद या गीत प्रस्तुत किया।

सदस्यों ने कभी शिक्षक तो कभी शरारती विद्यार्थी की भूमिका निभाकर कक्षा के रोचक प्रसंग जीवंत कर दिए। कई सदस्यों ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा किए और बचपन के पसंदीदा गीत सुनाए। हंसी और तालियों के बीच इस गतिविधि ने सभी को विद्यालयी जीवन की मधुर स्मृतियों से जोड़ दिया।

भजनों से गूंजा क्लब परिसर

जन्माष्टमी उत्सव में वीना अग्रवाल ने ‘अच्युतम केशवम् कृष्ण दामोदरम्’ भजन प्रस्तुत किया। डॉ. आर.के. सैनी ने ‘जय-जय कृष्णा, दरस दिखा दे मिट जाए तृष्णा’ भजन से वातावरण भक्तिमय बनाया। डॉ. कमलेश कुकड़ेजा ने ‘गुरु तो ज्ञान का सागर है’ गीत प्रस्तुत कर गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

समारोह के अंत में क्लब के प्रधान डॉ. एस.के. अग्रवाल ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए कहा कि शिक्षक मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने आयोजकों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के बाद आरबीएल बैंक की शाखा प्रबंधक प्रियंका के सौजन्य से जलपान कराया गया। समारोह आनंद, भक्ति और पुरानी स्मृतियों से भरपूर यादगार अवसर बन गया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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