कहा – आरक्षण केवल कानून का प्रावधान नहीं, सरकारी व्यवस्था में भागीदारी और सामाजिक न्याय की संवैधानिक गारंटी हो
केंद्र में लाखों पद रिक्त रखना और स्थायी रोजगार की जगह ठेका प्रथा बढ़ाना वंचित वर्गों के युवाओं के अधिकारों को कर रहा कमजोर
सिरसा, 25 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने केंद्र की भाजपा सरकार की रोजगार नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरक्षण केवल कानून की किताब में लिखा हुआ प्रावधान नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में एस सी, एसटी, ओबीसीऔर ईडब्ल्यूएस सहित वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सामाजिक न्याय प्रदान करने की संवैधानिक गारंटी है। लेकिन जब सरकार लाखों स्वीकृत पदों को वर्षों तक खाली रखेगी और स्थायी नौकरियों के स्थान पर ठेका एवं आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा देगी तो आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र युवाओं तक कैसे पहुंचेगा?
कुमारी सैलजा ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में रिक्त पदों की संख्या वर्ष 2015 के लगभग 4.21 लाख से बढ़कर वर्ष 2024 में 8.24 लाख से अधिक हो गई। रेलवे, रक्षा और गृह मंत्रालय सहित अनेक महत्वपूर्ण विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। सवाल यह है कि जब भर्ती ही नहीं होगी तो आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि लाखों पदों को भरने में इतनी देरी क्यों हो रही है और युवाओं को स्थायी सरकारी रोजगार के अवसरों से क्यों वंचित रखा जा रहा है।
सांसद ने कहा कि दूसरी गंभीर चिंता सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी व्यवस्थाओं में स्थायी रोजगार कम करके ठेका, आउटसोर्सिंग और अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं का विस्तार है। जिन नियमित पदों पर संवैधानिक आरक्षण लागू होता है, यदि उन्हीं पदों को खाली रखा जाए, समाप्त किया जाए अथवा काम को ठेके पर दे दिया जाए तो आरक्षण संविधान में तो मौजूद रहेगा, लेकिन रोजगार में उसकी वास्तविक हिस्सेदारी लगातार घटती जाएगी। इसका सबसे अधिक नुकसान उन युवाओं को होगा जिनके सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था की गई थी।
कुमारी सैलजा ने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। केंद्र सरकार सभी रिक्त स्वीकृत पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए, नियमित रोजगार के अवसर बढ़ाए और यह सुनिश्चित करे कि ठेका व्यवस्था के विस्तार की आड़ में एससी, एस टी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस रुपए वर्गों के संवैधानिक प्रतिनिधित्व एवं अधिकारों पर कोई आंच न आए। कांग्रेस सामाजिक न्याय, समान अवसर और संविधान से मिले प्रतिनिधित्व के अधिकार की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता से आवाज उठाती रहेगी।








