कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों से कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग
रेवाडी, 25 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को काले झंडे दिखाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
विद्रोही ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को काले झंडे दिखाकर किसी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करना लंबे समय से शांतिपूर्ण विरोध का हिस्सा रहा है। विपक्ष ही नहीं, सत्तारूढ़ दलों के कार्यकर्ता भी विभिन्न अवसरों पर विरोधी नेताओं को काले झंडे दिखाते रहे हैं। ऐसे में गुरुग्राम की घटना को लेकर पुलिस द्वारा अपनाया गया कथित कठोर रवैया कई सवाल खड़े करता है।
सामान्य बॉन्ड पर छोड़ने की रही है परंपरा
उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में वह कई बार सत्तारूढ़ दलों के नेताओं को काले झंडे दिखाने वाले प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। ऐसे मामलों में निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर प्रदर्शनकारियों को सामान्य बॉन्ड भरवाकर चेतावनी के साथ छोड़ दिया जाता था।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम में इसके विपरीत प्रदर्शनकारियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया और थाने में उनके साथ कथित रूप से मारपीट एवं प्रताड़ना की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के परिजनों को घरों से उठाकर थाने लाया गया तथा उनके साथ अभद्र व्यवहार और धमकी दी गई।
गंभीर धाराएं लगाने पर उठाए सवाल
विद्रोही के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ बीएनएस की धारा 163 के उल्लंघन के साथ-साथ कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में भी मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने इसे सत्ता के प्रभाव में पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी कार्रवाइयों पर अंकुश नहीं लगाया गया और समाज के विभिन्न वर्गों ने इसका विरोध नहीं किया, तो यह मामला केवल गुरुग्राम या कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे प्रदेश में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को कुचलने की गलत परंपरा शुरू हो सकती है।
विद्रोही ने कहा कि विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। सरकार तथा प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।








