कहा—तिरंगा यात्राओं में शहीदों का सम्मान नहीं, राजनीतिक महिमामंडन अधिक
स्वतंत्रता दिवस पर निष्पक्ष मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता के लिए संघर्ष का संकल्प लेने की अपील
रेवाड़ी, 14 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भारत स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे कर 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, लेकिन लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं के सामने गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों से लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में देश पर धीरे-धीरे संघ की विचारधारा थोपी जा रही है।
तिरंगा यात्राओं पर उठाए सवाल
विद्रोही ने कहा कि भाजपा की ओर से निकाली जा रही कथित तिरंगा यात्राओं में राजनीति और संगठन विशेष का महिमामंडन अधिक दिखाई देता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के प्रति सम्मान की वास्तविक भावना पीछे छूट गई है। लोकतंत्र और तिरंगे के सम्मान की बात तो की जाती है, लेकिन व्यवहार में उनके मूल्यों का पालन नहीं किया जा रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन यात्राओं के माध्यम से आजादी के आंदोलन के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को उचित सम्मान देने के बजाय राजनीतिक प्रचार किया जा रहा है।
जनसमस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप
विद्रोही ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याएं, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों सहित अनेक मुद्दों से आमजन परेशान हैं। ऐसे समय में तिरंगा यात्राओं और भावनात्मक मुद्दों के माध्यम से लोगों का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-संघ सत्ता और सरकारी संसाधनों का उपयोग कर नफरत, विभाजन और ध्रुवीकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रवाद का अर्थ किसी दल या संगठन का प्रचार नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना है।
विपक्ष का मजाक उड़ाना लोकतंत्र के लिए घातक
विद्रोही ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करने वाले विपक्षी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष के आंदोलनों को ‘काला जादू’ जैसी बातों से जोड़कर जनसमस्याओं को हल्का दिखाने का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया कि जब सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठे लोग ही विपक्ष की आवाज दबाने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे, तब संविधान, कानून का शासन, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता कैसे सुरक्षित रहेंगे?
मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल
विद्रोही ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को नियमों की आड़ लेने के बजाय सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों का दस्तावेजी और तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
विद्रोही ने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर उठे आरोप बेहद गंभीर हैं। इन आरोपों को स्वतः सत्य मानने के बजाय उनकी विश्वसनीय जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
स्वतंत्रता दिवस पर लोकतंत्र बचाने का संकल्प लें
विद्रोही ने नागरिकों से अपील की कि वे स्वतंत्रता दिवस पर संविधान, लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता की रक्षा का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि जब तक त्रुटिरहित एवं पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित नहीं होती और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संदेह दूर नहीं किए जाते, तब तक नागरिकों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज उठाते रहना चाहिए।
“तिरंगे का वास्तविक सम्मान केवल यात्रा निकालने में नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में है।”








