सरकार तत्काल वार्ता कर हड़ताल समाप्त करवाए; रेवाड़ी सहित पूरे हरियाणा में सफाई व्यवस्था मजबूत करने और पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती की मांग
रेवाड़ी, 10 अगस्त 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण रेवाड़ी सहित हरियाणा के विभिन्न शहरों और कस्बों में लगे गंदगी के ढेरों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भाजपा सरकार से आग्रह किया कि वह सफाई कर्मचारियों से तत्काल सार्थक वार्ता कर उनकी मांगों का समाधान करे और हड़ताल समाप्त करवाए। यदि हड़ताल लंबी चली तो गंदगी, दुर्गंध, मक्खियों और मच्छरों के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
विद्रोही ने कहा कि मानसून से पहले नाले-नालियों, सीवर लाइनों और जल निकासी मार्गों की समुचित सफाई नहीं होने से पहले ही पूरा हरियाणा गंदगी और जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। बारिश होते ही जगह-जगह नाले उफन रहे हैं, सीवर जाम हो रहे हैं और दूषित पानी सड़कों व रिहायशी क्षेत्रों में जमा हो रहा है। ऐसी स्थिति में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
दवा छिड़काव केवल कागजों तक सीमित
विद्रोही ने आरोप लगाया कि रेवाड़ी में मक्खियों और मच्छरों पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहीं भी प्रभावी दवा छिड़काव दिखाई नहीं दे रहा। सरकारी कागजों में भले ही फॉगिंग और दवा छिड़काव के दावे किए गए हों, लेकिन धरातल पर जनता को इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा।
उन्होंने कहा कि गंदगी, दूषित जल और बदबू के कारण मलेरिया, डेंगू, वायरल बुखार तथा पेट संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ने की आशंका है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
जुमलेबाजी नहीं, पर्याप्त सफाईकर्मियों की भर्ती करे सरकार
विद्रोही ने कहा कि मानसून के दौरान सफाई व्यवस्था को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मजबूत किया जाना चाहिए, लेकिन प्रदेश में इसके उलट हालात बने हुए हैं। सफाई कर्मचारियों की कमी, ठेका व्यवस्था और कर्मचारियों की लंबित मांगों की अनदेखी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
उन्होंने भाजपा सरकार से मांग की कि वह जुमलेबाजी छोड़कर रेवाड़ी सहित पूरे अहीरवाल और हरियाणा में सफाई व्यवस्था को मजबूत करे। खाली पदों पर पर्याप्त संख्या में नियमित सफाई कर्मचारियों की भर्ती की जाए तथा हड़ताली कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लिया जाए।
विद्रोही ने सवाल किया, “जब शहरों और कस्बों की आबादी के अनुरूप पर्याप्त सफाई कर्मचारी ही उपलब्ध नहीं होंगे, तब सरकार पुख्ता सफाई व्यवस्था का दावा कैसे कर सकती है?”
उन्होंने चेताया कि सरकार की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता को बीमारी तथा बदहाल नागरिक सुविधाओं के रूप में भुगतना पड़ सकता है। इसलिए सरकार बिना समय गंवाए कर्मचारियों से वार्ता करे, हड़ताल समाप्त करवाए और युद्धस्तर पर सफाई, फॉगिंग व दवा छिड़काव अभियान शुरू करे।








