हरियाणा के हक का पानी दिलवाने के लिए तत्परता दिखाए केंद्र सरकार- दीपेंद्र हुड्डा
चंडीगढ़, 6 अगस्त । जल जीवन मिशन 2.0 की बैठक में सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने एसवाईएल का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के सामने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाने और हरियाणा के हक का पानी दिलवाने के लिए केंद्र सरकार के दखल की मांग करी। इस मौके पर दीपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ सांसद जयप्रकाश जेपी, वरुण चौधरी, सतपाल ब्रह्मचारी और करमवीर बौद्ध भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री को सौंपे गए पत्र में दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाने का काम अब तक नहीं हुआ है। पंजाब को मौजूदा हालात से फायदा मिल रहा है, लेकिन हरियाणा के किसान बहुत परेशान हैं। यह पुराना विवाद पूरी तरह अटका पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 और 2004 में साफ-साफ नहर पूरा करने के आदेश दिए थे। 2016 में तो पंजाब के एग्रीमेंट खत्म करने वाले कानून को भी असंवैधानिक बता दिया था। फिर भी काम आगे नहीं बढ़ा।
जनवरी 2026 में हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की हाई-लेवल मीटिंग भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इससे साफ है कि सिर्फ राज्य स्तर की बातचीत से यह राजनीतिक अड़चन नहीं टूटेगी। केंद्र की सख्त निगरानी जरूरी है।
हरियाणा ने अपनी 92 किलोमीटर की नहर दशकों पहले ही काफी खर्च करके बना ली थी। लेकिन पंजाब में 122 किलोमीटर का हिस्सा आज भी अधूरा पड़ा है। इससे हरियाणा को रावी-ब्यास के पानी का अपना कानूनी हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।
इस देरी का असर काफी व्यापक और घातक होता जा रहा है। दक्षिणी और मध्य हरियाणा के जिलों में भूजल बहुत नीचे चला गया है – कहीं-कहीं 1700 फीट तक। भाखड़ा और पोंग जैसे जलाशयों में भी पानी कम है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा और कई गांवों में पीने का पानी भी किल्लत हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार हरियाणा का हक माना है, फिर भी राज्य को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मई 2025 की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में केंद्र ने सही कहा था कि सिर्फ बातचीत काफी नहीं, असल काम होना चाहिए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की साधारण मीटिंगों से कोई ठोस टाइमलाइन या हल नहीं निकलेगा।
इसलिए हम जल शक्ति मंत्रालय से जोरदार अपील करते हैं कि वह मजबूत केंद्रीय नेतृत्व दिखाए और बची हुई नहर बनाने का रोडमैप बनाए।
स्थानीय सुरक्षा की चिंताओं और प्रशासनिक हिचकिचाहट को देखते हुए मंत्रालय को सोचना चाहिए कि केंद्रीय निर्माण एजेंसियों को उचित सुरक्षा के साथ भेजकर काम करवाया जाए, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पूरे हों। साथ ही भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड हरियाणा के हिस्से का पानी बिना किसी रुकावट के जारी करे।
हरियाणा के लोग और किसान चार दशक से ज्यादा समय से अपने कानूनी हिस्से का पानी मांग रहे हैं। आपका तुरंत दखल राज्य की आजीविका बचाने और कानून का राज बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।








