हरियाणा में विनियामक सुधारों का दूसरा दौर

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अनुपालन बोझ घटा, विनियमन सरलीकरण बढ़ा

अनुमति प्रक्रिया सरल तो सेवाएं और अधिक प्रभावी

500 करोड़ के सक्षम फंड से होगा पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का कायाकल्प

चंडीगढ़, 6 अगस्त-हरियाणा सरकार ने सुशासन और कारोबारी सुगमता को नई दिशा देते हुए केन्द्र सरकार के ’अनुपालन बोझ कम करने एवं विनियमन सरलीकरण अभियान (कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डी-रेगुलेशन एक्सरसाइज) के दूसरे चरण’ के तहत चिन्हित 28 प्राथमिक सुधारों में से 21 सुधारों को या तो स्वीकृति प्रदान कर दी है अथवा उनका क्रियान्वयन शुरू कर दिया है।

यह जानकारी मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज केन्द्र-राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के उपरांत दी। बैठक की सह-अध्यक्षता केन्द्रीय कैबिनेट सचिवालय में विशेष सचिव श्री के.के. पाठक ने की।

मुख्य सचिव ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक नियामकीय प्रक्रियाओं को समाप्त करना, अनुमतियों को सरल एवं समयबद्ध बनाना, डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देना तथा उद्योगों, उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, किसानों और आम नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल एवं पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।

समीक्षा बैठक में भूमि विनियमन, औद्योगिक विकास, भवन निर्माण अनुमति, व्यापार लाइसेंस, श्रम सुधार, विद्युत, पर्यावरण,  स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन तथा प्रशासनिक सुधारों सहित 28 प्राथमिक क्षेत्रों में राज्य की प्रगति की समीक्षा की गई। विभिन्न विभागों ने शेष सुधारों के क्रियान्वयन के लिए अपनी कार्ययोजना भी प्रस्तुत की।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि हरियाणा संरचनात्मक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे न केवल अनुपालन लागत में कमी आएगी, बल्कि सुशासन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक प्लॉटों के उप-विभाजन, खाली प्लॉटों को पट्टे पर देने तथा लीज अवधि पूरी होने के बाद लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा तथा औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि संशोधित हरियाणा भवन संहिता के तहत उद्योगों के लिए फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और सेटबैक संबंधी नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है, जिससे औद्योगिक परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी मिल सकेगी।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये के सक्षम फंड का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस फंड से औद्योगिक क्षेत्रों में साझा आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (एचईपीसी) को निवेशकों के लिए एकल खिड़की प्रणाली के रूप में और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। इसके लिए एक पेशेवर परियोजना प्रबंधन इकाई (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) स्थापित की जाएगी, जो निवेशकों को स्वीकृति प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सहयोग प्रदान करेगी, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी तथा वैधानिक अनुमतियों में होने वाली देरी को कम करेगी।

मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार डिजिटल प्रशासन को और अधिक मजबूत बना रही है। इसके तहत राज्य के अधिनियमों, नियमों और सरकारी आदेशों की डिजिटल रिपोजिटरी तैयार की जा रही है। साथ ही सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता की निगरानी तथा हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत ऑटो अपील प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके।

उन्होंने बताया कि व्यापार लाइसेंस प्रणाली को सरल बनाने, लीगल मेट्रोलॉजी से संबंधित प्रक्रियाओं के सरलीकरण, बिजली कनेक्शन शीघ्र उपलब्ध कराने, भवन निर्माण अनुमतियों को आसान बनाने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणीकरण व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों से अनुपालन लागत कम होगी और उद्योगों को कारोबार शुरू करने एवं विस्तार देने में सुविधा मिलेगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुधारों को पूरा करने, लंबित मामलों का जल्द समाधान करने तथा केन्द्र सरकार के स्तर पर दी जाने वाली स्वीकृतियों के लिए सम्बन्धित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें स्वीकृतियां तेजी से मिलें, प्रक्रियाएं सरल हों और नागरिकों को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हों। राज्य सरकार का लक्ष्य अनावश्यक अनुपालनों को कम करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां निवेश, उद्यमिता और रोजगार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ हर नागरिक को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक श्री शेखर विद्यार्थी, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग, माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक श्री जितेंद्र कुमार, नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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