ग्रामीण भारत के अध्यक्ष का आरोप—सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार, अधिकांश सरकारी निर्माण समय से पहले हो रहे जर्जर
रेवाडी, 29 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार के प्रत्येक शहर में मॉडल सड़क बनाने के दावे को महज “जुमला” करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि पहले शहरों की सड़कों को गड्ढा मुक्त, मजबूत और टिकाऊ बना दे तो यही प्रदेश के शहरी नागरिकों के लिए सबसे बड़ा उपकार होगा।
विद्रोही ने कहा कि प्रदेश के लगभग सभी शहरों में मुख्य मार्गों से लेकर अंदरूनी सड़कों तक की हालत बेहद खराब है। उनके अनुसार ऐसी सड़क ढूंढना मुश्किल है जिसमें गड्ढे न हों या जो टूटी-फूटी न हो। उन्होंने कहा कि इन जर्जर सड़कों के कारण लोगों का सड़क यातायात पूरी तरह भगवान भरोसे है और किसी भी समय दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के सेक्टरों की सड़कों की स्थिति भी गांवों की गलियों से बदतर हो चुकी है। उनका कहना था कि प्रदेश में सड़कें बनने से पहले ही टूटने लगती हैं क्योंकि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि सरकारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार इस स्तर तक पहुंच चुका है कि सड़क, भवन, पुल, अंडरपास या गली—लगभग हर निर्माण एक वर्ष के भीतर जर्जर दिखाई देने लगता है। उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए किसी को दूर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपने क्षेत्र के किसी भी सरकारी निर्माण को देखकर वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में स्वीकृत राशि का केवल लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक निर्माण पर खर्च होता है, जबकि शेष राशि ठेकेदारों, अधिकारियों और सत्ताधारी नेताओं के बीच बंट जाती है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में अधिकांश सरकारी निर्माण कार्यों में केवल 25 से 40 प्रतिशत धन ही जमीन पर दिखाई देता है, जबकि 60 से 75 प्रतिशत राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हरियाणा में भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट चरम पर है तथा इसी कारण विकास कार्यों की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।







