मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हुए निर्णय – 3

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अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए गठित होगा वैधानिक आयोग

हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026 को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 28 जुलाई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में हुई  हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026 को मंजूरी प्रदान की गई।

इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके लिए उपलब्ध संवैधानिक एवं वैधानिक संरक्षणों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने तथा उनके सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन करना है।

आयोग में एक अध्यक्ष, पांच गैर-सरकारी सदस्य तथा सरकार द्वारा नियुक्त एक सचिव होगा। अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। विधेयक में उनके त्यागपत्र, पद से हटाने तथा रिक्त पदों को भरने संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।

आयोग अल्पसंख्यक समुदायों को प्राप्त संवैधानिक एवं वैधानिक संरक्षणों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा तथा उनके प्रभावी पालन के लिए सरकार को आवश्यक सुझाव देगा। इसके अतिरिक्त, आयोग अल्पसंख्यकों से संबंधित सरकारी नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की निगरानी करेगा, विभिन्न विषयों पर अध्ययन एवं अनुसंधान कराएगा, सरकारी सेवाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा तथा उनके कल्याण एवं विकास के लिए आवश्यक सिफारिशें करेगा। आयोग राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव एवं राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य करेगा। साथ ही, अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं संरक्षणों से संबंधित शिकायतों की जांच कर संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला उठाएगा।

आयोग को अपने वैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के लिए जांच के दौरान सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी। इसके अंतर्गत गवाहों को तलब करना एवं उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना, दस्तावेज प्रस्तुत कराने का निर्देश देना, शपथ-पत्रों के आधार पर साक्ष्य स्वीकार करना, सार्वजनिक अभिलेखों को तलब करना तथा गवाहों एवं दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करने जैसी शक्तियां शामिल होंगी।

विधेयक में आयोग के लिए सचिव एवं आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति, वार्षिक बजट तैयार करने, सरकार से अनुदान प्राप्त करने, लेखों का रखरखाव एवं लेखा-परीक्षा कराने तथा सरकार को वार्षिक एवं विशेष प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान भी किया गया है। इन प्रतिवेदनों को राज्य विधानमंडल के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आयोग की सिफारिश पर सरकार को आयोग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए पुस्तकालय, सूचना प्रकोष्ठ, अनुसंधान प्रकोष्ठ तथा अन्य विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का अधिकार भी होगा।

सशस्त्र बल एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के तीन शहीदों के आश्रितों को ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी

चंडीगढ़, 28 जुलाई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिवारों के कल्याण एवं पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए हरियाणा निवासी शहीद जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने संबंधी राज्य सरकार की नीति के प्रावधानों में राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

यह निर्णय हरियाणा सरकार की 30 मई, 2014 को अधिसूचित अनुकंपा नियुक्ति नीति तथा वर्ष 2014 और 2018 में किए गए संशोधनों के तहत लिया गया है। इस नीति के अनुसार हरियाणा के शहीद सशस्त्र बल एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के पात्र आश्रितों को शहीद की रैंक के अनुसार ग्रुप-बी, ग्रुप-सी अथवा ग्रुप-डी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान है।

मंत्रिमंडल ने ऐसे तीन मामलों में निर्धारित समय-सीमा में छूट देने को मंजूरी दी, जिनमें शहीद जवानों के पुत्र एवं पुत्रियां अपने माता-पिता की शहादत के समय नाबालिग थे। वयस्क होने के बाद तीनों आवेदकों ने छह माह के भीतर ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। चूंकि ये मामले पूर्व नीति में निर्धारित समय-सीमा से बाहर थे, इसलिए नीति के संबंधित प्रावधानों के तहत इनमें समय-सीमा में छूट देने को मंजूरी दी गई।

लाभार्थियों में करनाल निवासी स्वर्गीय एसडब्ल्यूआर श्री सुल्तान सिंह (भारतीय सेना) के पुत्र हर्ष, सीआरपीएफ के सिपाही भिवानी निवासी स्वर्गीय श्री प्रदीप कुमार की पुत्री खुशबू तथा श्री संदीप कुमार के पुत्र योगेश शामिल हैं। तीनों अपने माता-पिता की शहादत के समय नाबालिग थे और वयस्क होने के बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब तीनों को ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा।

अनुकंपा नियुक्ति नीति में वर्ष 2023 में कुछ संशोधनों के साथ बदलाव किए गए थे। हालांकि, संशोधित नीति में यह भी स्पष्ट किया गया कि पुराने मामलों का निपटारा उसी नीति के अनुसार किया जाएगा, जो उस समय लागू थी।

यह निर्णय देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के परिवारों के प्रति हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार उनके पात्र आश्रितों के समय पर पुनर्वास एवं सहयोग सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

भवनों तथा भूमि पर संपत्ति कर लगाने की एक नई पद्धति लागू

चंडीगढ़, 28 जुलाई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में नगर निगमों, नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं की सीमा के भीतर भवनों तथा भूमि पर संपत्ति कर लगाने की एक नई, सरलीकृत एवं पारदर्शी पद्धति को सैद्धांतिक (ULBs ) स्वीकृति प्रदान की गई।

यह नई पद्धति हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नगर निगमों के लिए तथा हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के अंतर्गत नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग अधिसूचित की जाएगी, और वर्ष 2013 की संपत्ति कर अधिसूचनाओं के स्थान पर लागू होगी। इससे राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मूल्यांकन की एक समान, सूत्र-आधारित प्रणाली लागू होगी।

पारदर्शिता एवं अनुपालन में सुगमता की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, नई प्रणाली में विवेकाधीन एवं जटिल मूल्यांकन प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूंजीगत मूल्य  की गणना हेतु एक स्पष्ट, सूत्र-आधारित पद्धति अपनाई गई है कृ जो प्लॉट क्षेत्र अथवा कारपेट क्षेत्र, लागू कलेक्टर दर, तथा फ्लोर फैक्टर पर आधारित है।

शहरों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है – नगर निगमों के लिए ए1 एवं ए2, तथा नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए बी एवं सी तथा प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम कर दरें निर्धारित की गई हैं। इससे संपत्ति मालिकों के लिए अधिक पूर्वानुमेयता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, जबकि नगर निकायों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर दरें तय करने की लचीलापन प्राप्त होगी।

नई पद्धति में एक उपयोग-आधारित गुणन कारक भी शामिल किया गया है, जो संपत्ति के आकार एवं उपयोग की प्रकृति – आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत अथवा विशेष श्रेणी के आधार पर कर देयता को जोड़ता है, जिससे कर का बोझ समान एवं आनुपातिक बना रहे। संपत्ति मालिकों को अचानक वृद्धि से बचाने हेतु, नई प्रणाली के तहत कर देयता में वृद्धि को सीमित किया गया है तथा पूर्ण संशोधित मूल्यांकित मूल्य तक पहुंचने तक इसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा।

व्यापक छूट

जनहित को ध्यान में रखते हुए, नई नीति में संपत्ति कर से व्यापक छूट का प्रावधान किया गया है। प्रमुख छूटों में शामिल हैं :

-धार्मिक संपत्तियां, जिनमें मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे एवं मस्जिदें शामिल हैं, जो जनता को निःशुल्क सेवाएं प्रदान करती हैं – 100% छूट।

-पट्टे या किराए पर न दी गई नगरपालिका संपत्तियां।

-अनाथालय, वृद्धाश्रम, श्मशान एवं कब्रिस्तान तथा धर्मशालाएं।

-सरकारी शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी अस्पताल।

– विशुद्ध रूप से कृषि प्रयोजनों हेतु उपयोग की जाने वाली संपत्तियां।

– सभी गौशालाएं (दूध, डेयरी उत्पाद, जैविक उर्वरक, बायो-सीएनजी/ध्बायोगैस, गोबर एवं गोमूत्र की बिक्री के अतिरिक्त किसी व्यावसायिक प्रयोजन हेतु प्रयुक्त भाग को छोड़कर)।

-सेवारत / भूतपूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बल कार्मिकों तथा शहीद सैनिकों के परिवारों के स्व-अधिवासित आवासीय मकान (250 वर्ग मीटर तक)।

-स्वतंत्रता सेनानियों, उनके जीवनसाथी एवं युद्ध विधवाओं के स्व-अधिवासित आवासीय मकान।

– धर्मार्थ शैक्षणिक संस्थान, धर्मार्थ अस्पताल, तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) हेतु विद्यालय।

– नगरपालिका सीमा में नव-सम्मिलित गांवों के लाल डोरा क्षेत्र में स्थित आवासीय संपत्तियां, सम्मिलन की तिथि से पांच वर्षों तक (अधिकतम तीन मंजिल तक)।

– निःशुल्क अथवा अवैतनिक पार्किंग इकाइयां।

*अनुपालन एवं सामाजिक कल्याण को प्रोत्साहित करने हेतु छूट*

नई पद्धति में समय पर अनुपालन को पुरस्कृत करने तथा सामाजिक कल्याण उद्देश्यों को समर्थन देने हेतु एक संरचित छूट ढांचा भी शामिल किया गया है। प्रमुख छूट इस प्रकार हैं :

-नगरपालिका सीमा में स्थित मौजूदा गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों पर संपत्ति कर में 75 % छूट

– प्रति संपत्ति अधिकतम 25 % तक संयुक्त छूट, जिसमें शामिल है .

-चालू आकलन वर्ष के 30 अप्रैल तक बकाया राशि सहित सभी देय राशियों का भुगतान करने पर 10 % छूट .

– लगातार 3 पूर्ववर्ती वर्षों तक समय पर कर भुगतान करने वाले अच्छे करदाताओं को 5 % छूट

– महिलाओं के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 25 % छूट (संयुक्त स्वामित्व की स्थिति में आनुपातिक)।

-दिव्यांग व्यक्तियों (40% या अधिक दिव्यांगता) के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 10% छूट

– पूर्ण रूप से क्रियाशील शून्य-अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली वाले ग्रुप हाउसिंग सोसायटी / प्रॉपर्टी क्लस्टर हेतु 10 % छूट .

इन छूटों का उद्देश्य समय पर भुगतान, पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं तथा समावेशी स्वामित्व को प्रोत्साहित करना है।

*संपत्ति मालिकों के लिए सुगम लेन-देन*

सुगम लेन-देन सुनिश्चित करने हेतु, संपत्ति मालिकों के पास नई अधिसूचना की तिथि से एक माह तक पुरानी वर्ष 2013 अधिसूचना के अनुसार कर भुगतान का विकल्प रहेगा, जिसके पश्चात संशोधित प्रणाली लागू होगी। जिन संपत्ति मालिकों ने पहले ही अपना बकाया चुका दिया है, उन पर इस नई अधिसूचना का वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं उससे पूर्व के बकाया एवं ब्याज पर कोई असर नहीं होगा।

यह ऐतिहासिक सुधार हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समतापूर्ण एवं नागरिक-अनुकूल बनाने के साथ-साथ बेहतर नागरिक सेवाओं एवं अवसंरचना के वित्तपोषण हेतु नगर निकायों के राजस्व आधार को सुदृढ़ करेगा।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने नगर निकाय क्षेत्रों में आवासीय प्लॉटेड आवास के लिए टाउन प्लानिंग योजना को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 28 जुलाई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नगर निकाय क्षेत्रों में, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रावधान लागू नहीं हैं, आवासीय प्लॉटेड आवास हेतु नई टाउन प्लानिंग योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना का उद्देश्य ऐसे नगर निकाय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं विनियमित आवासीय विकास सुनिश्चित करना है।

स्वीकृत योजना के अनुसार, आवासीय प्लॉटेड आवास परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 5 एकड़ भूमि आवश्यक होगी, जबकि अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परियोजना स्थल तक पहुंचने के लिए मौजूदा सड़क होनी चाहिए, जिसकी चौड़ाई कम से कम 33 फुट हो। योजना के तहत आवासीय प्लॉटों का आकार 50 वर्गमीटर से 250 वर्गमीटर के बीच होगा। साथ ही प्रत्येक परियोजना में कम से कम 50 प्रतिशत आवासीय प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि किफायती आवास को बढ़ावा मिल सके। योजना के अनुसार, परियोजना क्षेत्र के अधिकतम 65 प्रतिशत हिस्से का उपयोग आवासीय एवं वाणिज्यिक प्लॉटों के लिए किया जा सकेगा, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र का हिस्सा अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अतिरिक्त, परियोजना के भीतर सभी आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई 10 मीटर निर्धारित की गई है।

स्वीकृत प्रावधानों के तहत, डेवलपर्स को हरियाणा शहरी अवसंरचना विकास बोर्ड (एचयूआईडीबी) के मुख्य प्रशासक को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्क्रूटनी शुल्क जमा कराना होगा। इसके अलावा, उन्हें लो-पोटेंशियल जोन में आवासीय उपयोग के लिए लागू परिवर्तन शुल्क (Conversion Charges) का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके साथ ही, डेवलपर्स को प्रचलित बाह्य विकास शुल्क ( External Development Charges ) का 25 प्रतिशत विकास शुल्क के रूप में एचयूआईडीबी को देना होगा। यह दर नगर समितियों और नगर परिषदों दोनों में समान रूप से लागू होगी।

नई योजना राज्य में आवासीय विकास के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराने, अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने, आवास क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा अनधिकृत कॉलोनियों की बढ़ौतरी में काफी कमी आएगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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