राव नरेंद्र सिंह बोले—12 वर्षों में न स्कूल सुधरे, न शिक्षक भर्ती; युवाओं के भविष्य से हो रहा खिलवाड़
चंडीगढ़, 27 जुलाई। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ (UDISE+) रिपोर्ट का हवाला देते हुए भाजपा सरकार पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े ही हरियाणा के सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति, आधारभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के रिक्त पदों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे और प्रचार तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यदि केंद्र की रिपोर्ट में स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति और शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों का उल्लेख है, तो भाजपा सरकार को जवाब देना चाहिए कि पिछले लगभग 12 वर्षों में शिक्षा सुधार के दावे धरातल पर क्यों नहीं उतर पाए।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालय आज भी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। बड़ी संख्या में शिक्षक पद रिक्त हैं और नियमित भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार न तो विद्यालयों का आधारभूत ढांचा मजबूत कर सकी और न ही समय पर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित कर पाई, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव का असर रोजगार पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है और सरकारी भर्तियों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसकी जिम्मेदारी युवाओं की है या फिर पिछले लगभग 12 वर्षों से शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को कमजोर करने वाली सरकार की।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि न्यूनतम पात्रता स्तर पर भी बड़ी संख्या में युवा सफल नहीं हो पा रहे हैं, तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियां, शिक्षकों की भारी कमी और नीतिगत विफलताएं इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। युवाओं को दोष देने के बजाय सरकार को अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रदेश के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, सभी रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए, प्रत्येक विद्यालय में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा सभी भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए।
राव नरेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार ने तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश की पूरी एक पीढ़ी इसका खामियाजा भुगतेगी। उन्होंने कहा कि अभी भी समय है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस सुधार लागू करे, अन्यथा भविष्य में इसकी भारी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी।








