गुरुग्राम-नूंह की बिजली आपूर्ति निजी हाथों में सौंपने की तैयारी, अडानी को लाभ पहुंचाने का आरोप : विद्रोही

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ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने गुरुग्राम-नूंह बिजली वितरण के निजीकरण को बताया सरकारी निगमों के हितों के खिलाफ कदम

रेवाड़ी, 14 जुलाई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार गुरुग्राम और नूंह जिले की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को निजी कंपनियों को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से अडानी समूह की कंपनी को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है और इसे उन्होंने “मोडानी मॉडल” का विस्तार बताया।

विद्रोही ने कहा कि वर्तमान में दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) प्रदेश के 10 जिलों में बिजली आपूर्ति का कार्य करता है, जबकि गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनियों को बिजली वितरण का ठेका देने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा आयोजित जनसुनवाई महज औपचारिकता है और इसके बाद निजी कंपनियों के लिए रास्ता साफ कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को बिजली वितरण का ठेका देने के लिए जारी निविदा प्रक्रिया में अंतिम समय में अडानी एनर्जी के शामिल होने से यह लगभग तय माना जा रहा है कि गुरुग्राम और नूंह की बिजली आपूर्ति का दायित्व इसी कंपनी को सौंपा जाएगा।

वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने कृषि नलकूपों की बिजली आपूर्ति को अलग करने के उद्देश्य से उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के अतिरिक्त एग्रो बिजली वितरण निगम का गठन किया है, जिसे 15 अगस्त 2026 से कृषि नलकूपों को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उनके अनुसार, इससे बिजली वितरण निगमों के लाभदायक उपभोक्ता क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने की रणनीति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के 10 जिलों की कुल वार्षिक बिजली बिलिंग लगभग 22 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले गुरुग्राम का योगदान लगभग 9,365 करोड़ रुपये, अर्थात कुल राजस्व का करीब 43 प्रतिशत है। विद्रोही का आरोप है कि यदि यह राजस्व निजी कंपनियों को हस्तांतरित किया जाता है तो इससे सरकारी बिजली वितरण निगम की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने इसे सार्वजनिक क्षेत्र के हितों के विरुद्ध बताते हुए आमजन से अपील की कि वे बिजली वितरण के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध करें और राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को सार्वजनिक नियंत्रण में बनाए रखने के लिए आवाज उठाएं।

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Author: Bharat Sarathi

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