महिला संगठनों ने जनगणना और परिसीमन की शर्त हटाकर आरक्षण लागू करने की मांग उठाई, 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा धरना-प्रदर्शन

गुरुग्राम/रोहतक, 14 जुलाई। महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर देशभर के महिला संगठनों, नागरिक समाज समूहों और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से मानसून सत्र में आवश्यक संशोधन कर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्त से अलग करते हुए बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की ओर से रोहतक स्थित मैना ट्यूरिज्म में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न संगठनों की महिला प्रतिनिधियों ने भाग लेकर महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने की मांग दोहराई।

पत्रकार वार्ता को जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जगमति सांगवान, केंद्रीय कमेटी सदस्य प्रो. मंजीत राठी, राज्य महासचिव उषा सरोहा, राज्य अध्यक्ष सविता, राज्य कमेटी सदस्य राजकुमारी दहिया, जिला सहसचिव मुनमुन हजारिका, सीटू की कामकाजी महिला समन्वय समिति की सह-संयोजक किरण, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति की समता संयोजक मनीषा, इतिहासकार एवं सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नीलिमा दहिया, इनेलो महिला विंग की राज्य महासचिव सुशीला देशवाल, जन संघर्ष मंच की राज्य उपाध्यक्ष डॉ. सुनीता त्यागी, बिरमति चहल, कुन्ती देवी, प्रवासी नेपाली संघ की उपाध्यक्ष अनीता, खिमा देवी, एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अक्षय, विकलांग अधिकार मंच के राज्य अध्यक्ष ऋषिकेश राजली तथा सर्व कर्मचारी संघ के जिला कोषाध्यक्ष जोगेंद्र दलाल सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी कर रही है। उनका कहना था कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का आंदोलन कई दशकों पुराना है और इस संबंध में पहला विधेयक वर्ष 1996 में पेश किया गया था। वर्ष 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित होने के बावजूद इसे जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया गया, जिससे इसके लागू होने में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
महिला नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन के अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देख रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी लगभग 13 प्रतिशत तथा विधानसभाओं में 9 प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में महिला आरक्षण लागू करने में और देरी करना महिलाओं के लंबे संघर्ष के साथ अन्याय होगा।
संगठनों ने मांग की कि केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान महिला आरक्षण अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करे।
महिला संगठनों ने यह भी घोषणा की कि 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन के माध्यम से केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने का दबाव बनाया जाएगा।








