स्थाई समाधान और पूर्व तैयारियों का दिखा असर, भारी बारिश के बावजूद कई क्षेत्रों में नहीं हुआ जलभराव

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तालाबों में पहुंचा 10 से 12 फीट तक वर्षा जल, राजेंद्र पार्क, सूरत नगर, सेक्टर-17, वार्ड-30 और वार्ड-32 में प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था से मिली बड़ी राहत

गुरुग्राम, 8 जुलाई। गुरुग्राम में हुई भारी बारिश के दौरान नगर निगम गुरुग्राम द्वारा मानसून से पहले किए गए स्थाई समाधान एवं व्यापक तैयारियों के सकारात्मक परिणाम सामने आए। शहर के कई ऐसे क्षेत्र, जहां पूर्व में जलभराव की समस्या रहती थी, इस बार बेहतर जलनिकासी व्यवस्था के कारण जलभराव मुक्त रहे। वहीं नगर निगम की पोंड रिवाइवल कमेटी द्वारा तालाबों की डी-वाटरिंग से वर्षा जल संचय को भी बड़ी सफलता मिली।

तालाब बने वर्षा जल के प्राकृतिक भंडार

मानसून से पहले नगर निगम द्वारा विभिन्न तालाबों की डी-वाटरिंग कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई थी। भारी बारिश के दौरान पलड़ा, धनवापुर, ट्यूलिप चौक, खेड़की माजरा और दरबारीपुर सहित कई तालाबों में 10 से 12 फीट तक वर्षा जल पहुंचा। इससे लाखों लीटर वर्षा जल का संचय हुआ तथा आसपास के क्षेत्रों में जलभराव का दबाव भी कम हुआ। नगर निगम द्वारा मानसून से पूर्व प्राथमिकता के आधार पर 28 तालाबो की गहराई बढ़ाने, डी वाटरिंग और आसपास के जलभराव संभावित स्थानों से जोड़ने का काम किया गया था। यह पहल जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और शहरी जल प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई।

राजेंद्र पार्क में दशकों पुरानी समस्या का हुआ समाधान

राजेंद्र पार्क, वार्ड-34 में वर्षों से जलभराव एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। नगर निगम द्वारा किए गए स्थाई ड्रेनेज सुधारों के बाद इस बार 87 एमएम भारी बारिश के बावजूद क्षेत्र में जलभराव नहीं हुआ। एकता वाली गली, शिव मूर्ति गोल चक्कर और सूरत नगर गली नंबर-17 जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी वर्षा जल की निकासी सुचारु रही। साथ ही जहाजगढ़ एसटीपी तक 40 एमएलडी से अधिक पानी पहुंचा, जो बेहतर ड्रेनेज नेटवर्क का सकारात्मक परिणाम है।

सेक्टर-17 में भी सफल रहा स्थाई ड्रेनेज सिस्टम

सेक्टर-17, वार्ड-25 में नगर निगम द्वारा पूर्व में किए गए स्थाई जलनिकासी कार्यों का असर इस मानसून में स्पष्ट दिखाई दिया। भारी बारिश के बावजूद क्षेत्र में पानी का ठहराव नहीं हुआ और वर्षा जल की निकासी व्यवस्थित रूप से होती रही। इससे स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली।

वार्ड-30 और वार्ड-32 में त्वरित कार्रवाई से मिली राहत

वार्ड-30 और वार्ड-32 में भी नगर निगम की फील्ड टीमें लगातार सक्रिय रहीं। ट्रैक्टर माउंटेड पंप, डी-वाटरिंग मशीनों और अन्य संसाधनों की सहायता से जलभराव वाले स्थानों पर तेजी से पानी निकाला गया। अधिकारियों द्वारा लगातार फील्ड मॉनिटरिंग और त्वरित निर्णयों के कारण नागरिकों की आवाजाही सामान्य बनाए रखने में सफलता मिली।

स्थाई समाधान और फील्ड टीमों के समन्वय का मिला लाभ

नगर निगम द्वारा मानसून से पहले ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने, गली ट्रैप (जीटी) की सफाई, स्टॉर्म वाटर ड्रेनों की मरम्मत, तालाबों की डी-वाटरिंग और संवेदनशील स्थानों की पहचान जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए गए थे। बारिश के दौरान इन तैयारियों के साथ-साथ फील्ड टीमों की त्वरित कार्रवाई और आधुनिक मशीनरी के उपयोग से जलनिकासी व्यवस्था प्रभावी बनी रही।

नागरिकों से सहयोग की अपील

नगर निगम गुरुग्राम ने नागरिकों से अपील की है कि वे गली ट्रैप और नालों में कूड़ा या मलबा न डालें तथा वर्षा जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग करें। जनसहभागिता और बेहतर शहरी प्रबंधन के माध्यम से ही जलभराव मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित गुरुग्राम का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

मेयर राजरानी मल्होत्रा ने कहा कि नगर निगम गुरुग्राम द्वारा मानसून से पूर्व किए गए स्थाई समाधान और योजनाबद्ध तैयारियों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं। तालाबों की डी-वाटरिंग से जहां बड़ी मात्रा में वर्षा जल का संचय हुआ है, वहीं राजेंद्र पार्क, सेक्टर-17, वार्ड-30 और वार्ड-32 सहित विभिन्न क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की टीमें, अधिकारी और पार्षद आपसी समन्वय के साथ लगातार कार्य कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि जलभराव की पुरानी समस्याओं का तात्कालिक नहीं, बल्कि स्थाई समाधान किया जाए और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि मानसून से पूर्व नगर निगम द्वारा जलभराव की पुरानी समस्याओं के स्थाई समाधान पर विशेष फोकस किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम भारी बारिश के दौरान देखने को मिले हैं। राजेंद्र पार्क, सेक्टर-17, वार्ड-30 और वार्ड-32 सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए जलनिकासी सुधार कार्यों से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। वहीं, तालाबों की डी-वाटरिंग से उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ी और भारी मात्रा में वर्षा जल का संचय संभव हुआ। उन्होंने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य केवल बारिश के दौरान पानी निकालना नहीं, बल्कि तकनीकी योजना और मजबूत ड्रेनेज नेटवर्क के माध्यम से जलभराव की समस्याओं का स्थाई समाधान करना है। फील्ड टीमों को संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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