फैक्ट्रियों में घुसा पानी, करोड़ों का नुकसान

गुरुग्राम। प्री-मानसून की पहली ही तेज बारिश ने गुरुग्राम के आईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में विकास और निवेश के सरकारी दावों की हकीकत सामने ला दी। जिस प्रदेश को उद्योग और निवेश का केंद्र बताकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों पर जलभराव और फैक्ट्रियों के भीतर घुसा पानी सरकार और प्रशासन की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
बारिश के बाद आईडीसी क्षेत्र की कई फैक्ट्रियों के बेसमेंट पानी से भर गए, जिससे करोड़ों रुपये की मशीनें, विद्युत उपकरण और कच्चा माल प्रभावित हुआ तथा उत्पादन कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया। कई स्थानों पर बिजली के तार और पेड़ गिरने से घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही और उद्योगों का कामकाज रुक गया। पेड़ों के गिरने से कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए।


आईडीसी के प्रधान धर्मसागर तथा क्षेत्र के उद्यमियों सुनील दत्ता, विजय टंडन, देवेंद्र जैन, प्रवीण वर्मा और तरुण खन्ना ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उद्योगों से कर और राजस्व वसूलने वाली सरकार संकट की घड़ी में उद्योगों को उनके हाल पर छोड़ देती है। वर्षों से जल निकासी व्यवस्था, सीवरेज और बिजली ढांचे को मजबूत करने की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
धर्मसागर ने कहा कि सरकार एक तरफ निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश-विदेश में रोड शो और निवेश सम्मेलन आयोजित करती है, जबकि दूसरी तरफ लगभग 60 वर्ष पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की हालत ऐसी है कि पहली ही बारिश में उद्योग जलमग्न हो जाते हैं। सवाल यह है कि जब मौजूदा उद्योगों को ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, तो नए निवेशक आखिर किस भरोसे यहां आएंगे?


उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, औद्योगिक विकास और एमएसएमई प्रोत्साहन के दावे केवल विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। जमीन पर स्थिति यह है कि छोटे और मध्यम उद्योग हर बरसात में करोड़ों रुपये का नुकसान झेलने को मजबूर हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।
उद्यमियों ने आरोप लगाया कि यदि उद्योगों को सड़क, जल निकासी, बिजली और सुरक्षा जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो सरकार को निवेश और रोजगार सृजन के बड़े-बड़े दावे करने से बचना चाहिए। उद्योग केवल घोषणाओं और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे और संवेदनशील प्रशासन से चलते हैं।
धर्मसागर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने शीघ्र ही औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया, तो अनेक उद्योग अपनी इकाइयों को दूसरे राज्यों और बेहतर सुविधाओं वाले औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होंगे। इसका सीधा असर रोजगार, निवेश और प्रदेश के राजस्व पर पड़ेगा।
प्री-मानसून की एक बारिश ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उद्योगों को विकास का इंजन बताने वाली सरकार औद्योगिक क्षेत्रों को बुनियादी सुविधाएं देने में बार-बार क्यों विफल साबित हो रही है?







