मनरेगा की जगह लाई गई वीबीजी रामजी योजना ग्रामीण मजदूरों के पेट पर लात, विकास कार्य भी होंगे प्रभावित : विद्रोही

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नई योजना में रोजगार की गारंटी नहीं, बेरोजगारी भत्ते के नियम भी अस्पष्ट : वेदप्रकाश विद्रोही

ग्राम पंचायतों के अधिकार खत्म, विकास कार्यों का निर्णय अब केंद्र करेगा : आरोप

रेवाड़ी, 2 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने एक जुलाई से मनरेगा के स्थान पर लागू की गई वीबीजी रामजी योजना को ग्रामीण मजदूरों और गांवों के विकास के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे “ग्रामीण मजदूरों के पेट पर लात मारने वाली योजना” करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह योजना धरातल पर प्रभावी होने के बजाय केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी, जबकि मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों की आवश्यकता और प्राथमिकताओं के अनुसार संचालित विकास कार्य भी बाधित होंगे।

विद्रोही ने कहा कि मनरेगा की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी थी, जबकि नई वीबीजी रामजी योजना में ऐसी कोई स्पष्ट गारंटी नहीं है। उन्होंने बताया कि योजना में केवल इतना प्रावधान है कि यदि काम मांगने वाले मजदूर को 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा, लेकिन यह भत्ता कब, कितना और किन शर्तों पर मिलेगा, इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्राम पंचायतों को अपने गांव में इस योजना के तहत अपनी जरूरत के अनुसार विकास कार्य कराने का अधिकार ही नहीं रहेगा, तो ग्रामीण मजदूर रोजगार की मांग किससे और कहां करेंगे। उनके अनुसार अब यह अधिकार न तो ग्राम पंचायतों के पास रहेगा और न ही राज्य सरकारों के पास, बल्कि केंद्र सरकार तय करेगी कि किस गांव में कौन-सा विकास कार्य कराया जाएगा।

वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था में राज्य सरकार को विकास कार्यों के लिए 40 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी, जबकि केंद्र सरकार 60 प्रतिशत हिस्सा देगी। यदि राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी नहीं देगी तो केंद्र का अंश भी जारी नहीं होगा। उनका कहना था कि इस व्यवस्था के कारण कई राज्यों में विकास कार्य प्रभावित होंगे और ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर भी सीमित हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार ने वीबीजी रामजी योजना के माध्यम से मनरेगा की उस मूल अवधारणा को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर विकास कार्य भी किए जाते थे। उनका आरोप है कि यह नई योजना व्यवहारिक कम और कागजी अधिक दिखाई देती है।

विद्रोही ने कहा कि मनरेगा को समाप्त कर लागू की गई वीबीजी रामजी ग्रामीण रोजगार योजना आम जनता को भ्रमित करने वाली योजना साबित होगी और इसके धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू होने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस योजना की खामियों को दूर नहीं किया गया तो ग्रामीण रोजगार और गांवों के विकास दोनों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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Author: Bharat Sarathi

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