हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी को मिला ‘विप्र गौरव सम्मान’

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महेंद्रगढ़ में सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं ने किया नागरिक अभिनंदन, कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान को मिली सराहना

महेंद्रगढ़, 1 जुलाई। ( प्रमोद कौशिक) हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और लोक कलाओं के संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी को महेंद्रगढ़ में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में प्रतिष्ठित ‘विप्र गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से आयोजित भव्य समारोह में उन्हें समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया।

समारोह में ब्राह्मण सभा महेंद्रगढ़, ब्राह्मण सभा कनीना, अग्रवाल सभा, सैनी क्षत्रिय सभा, प्रजापति सभा, व्यापार मंडल, सामना आर्ट एंड कल्चरल ग्रुप, भारत विकास परिषद, अखिल भारतीय विकास परिषद, ब्राह्मण सभा अटेली, पर्यावरण विभाग, यादव सभा, ब्राह्मण सभा सतनाली तथा बाल चरित्र निर्माण सभा सहित अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने महेश जोशी का अभिनंदन किया। वक्ताओं ने हरियाणा कला परिषद में उनके नेतृत्व और कला-संस्कृति के प्रति उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण की सराहना की।

ब्राह्मण सभा महेंद्रगढ़ के प्रधान दिनेश वैद ने कहा कि महेश जोशी ने हरियाणा की लोक कलाओं और पारंपरिक कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि समाज के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास में उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें ‘विप्र गौरव सम्मान’ प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

सम्मान ग्रहण करते हुए महेश जोशी ने सभी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि हरियाणा की उस प्रत्येक कला, कलाकार और सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान है, जो अपनी विरासत को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का मूल दायित्व समाज को सकारात्मक दिशा देना तथा ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है। उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निर्वहन वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करते रहेंगे।

महेश जोशी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ कदम मिलाते हुए भी अपनी लोक कलाओं, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों को कभी न भूलें। समारोह के अंत में विभिन्न संस्थाओं की ओर से उन्हें पगड़ी पहनाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना की गई।

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Author: Bharat Sarathi

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