सेक्टर-31 एवं सेक्टर-54 में दो पायलट रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर
आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है परियोजना का क्रियान्वयन
सफल होने पर गुरुग्राम के अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल को किया जाएगा लागु : सीईओ

गुरुग्राम, 30 जून। गुरुग्राम शहर में बाढ़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने तथा सतत जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने पायलट आधार पर दो एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) संरचनाओं के निर्माण का कार्य शुरू किया है। यह परियोजना आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है, जिसका उद्देश्य मानसून के दौरान जलभराव को कम करने के साथ-साथ भूजल को रिचार्ज करना भी है।
यह जानकारी देते हुए जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने कहा कि प्राधिकरण गुरुग्राम शहर की जल निकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली शहरी क्षेत्रों की दो प्रमुख चुनौतियों—वर्षा जल निकासी प्रबंधन तथा भूजल स्तर में गिरावट—का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकती है।

उन्होंने बताया कि पायलट परियोजना के तहत गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित एआईटी चौक के निकट स्मृति वाटिका पार्क तथा सेक्टर-31 में वर्षा जल संचयन स्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। इन स्ट्रक्चरों का डिजाइन आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है तथा इनका निर्माण कार्य संस्थान के रिसर्च स्कॉलरों की देख रेख में किया जा रहा है ।
स्मृति वाटिका पार्क में लगभग 480-480 फीट गहराई के दो रिचार्ज बोरवेल का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जिनके माध्यम से वर्षा जल को भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। वहीं सेक्टर-31 में लगभग 500 फीट गहरा रिचार्ज बोरवेल तैयार कर आवश्यक रिचार्ज स्ट्रक्चर भी स्थापित किया गया है।
श्री मीणा ने बताया कि इन स्ट्रक्चरों का निर्माण मास्टर सड़कों एवं ग्रीन बेल्ट के किनारे किया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान आने वाले वर्षा जल को एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके से ज़मीन के अंदर पहुंचाया जा सके। एकत्रित वर्षा जल को फिल्टर करने के बाद भूमिगत चिन्हित मोटी बजरी (कोर्स ग्रेवल) एवं दरारयुक्त एक्वीफर परतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल का प्रभावी रिचार्ज होगा। साथ ही सड़कों पर वर्षा जल का बहाव एवं अस्थायी जलभराव भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना जलभराव संभावित क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन और शहरी जल निकासी प्रबंधन के एकीकृत मॉडल के रूप में कार्य करेगी। पायलट परियोजना के परिणामों और प्रभावशीलता के आधार पर जीएमडीए शहर के अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी इसी प्रकार के स्ट्रक्चर विकसित करेगा।
यह पायलट परियोजना जीएमडीए की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सेक्टर-1 से 57 तक के क्षेत्र में कुल पांच एक्वीफर आधारित वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जानी हैं।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि वर्षा जल संचयन सतत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इससे भूजल संसाधनों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाने तथा गुरुग्राम को भविष्य के लिए अधिक जल-प्रबंधन युक्त शहर बनाने में मदद मिलेगी ।








