वानप्रस्थ में ‘वृद्धावस्था में तनाव प्रबंधन’ विषय पर प्रेरक व्याख्यान

हिसार। “यह ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा, इसलिए इसे फिर से जीना सीखिए।” इसी प्रेरक संदेश के साथ वानप्रस्थ सीनियर सिटीज़न्स क्लब में ‘वृद्धावस्था में तनाव प्रबंधन’ विषय पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को तनावमुक्त एवं स्वस्थ जीवन जीने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा कौशिक, मीडिया शिक्षाविद एवं व्यक्तित्व विकास विशेषज्ञ, ने कहा कि वृद्धावस्था जीवन का स्वाभाविक चरण है, जिसमें अनेक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिवर्तन आते हैं। यदि इन परिवर्तनों को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार किया जाए तो जीवन का यह काल भी आनंदमय और संतोषपूर्ण बन सकता है। उन्होंने कहा कि सीमित एवं सकारात्मक तनाव हमें सजग रखता है, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसलिए तनाव को पहचानकर उसका समय रहते प्रबंधन करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था तनाव का पर्याय नहीं है। नियमित योग, ध्यान, संगीत, मित्रों से संवाद, कृतज्ञता का भाव, नई रुचियाँ विकसित करना तथा नई तकनीक सीखना मन और शरीर दोनों को स्वस्थ रखते हैं। उन्होंने भविष्य के स्वास्थ्य, आर्थिक एवं सामाजिक प्रबंधन की समय रहते योजना बनाने पर भी बल दिया।
डॉ. कौशिक ने अपनी 76 वर्षीय माता का उदाहरण देते हुए बताया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद सर्वप्रथम हिसार के ही अनुभवी,कुशल और विशेषज्ञ डाक्टर्स द्वारा उपचार के साथ सकारात्मक सोच, नियमित सैर, योग और व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली के बल पर वे आज वो स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न जीवन जी रही हैं। उन्होंने कहा कि सही सोच और अनुशासित जीवनशैली से जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

विशिष्ट वक्ता कैलिफ़ोर्निया (अमेरिका) से आईं मनोचिकित्सक डॉ. विदुषी सावंत ने तनावमुक्त जीवन के लिए “व्हील ऑफ़ बैलेंस” के आठ सूत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने विशेष रूप से जैविक घड़ी अथवा ( सीकरडियन रिदम) का महत्व बताते हुए कहा कि हमारे शरीर की जैविक घड़ी नियमित समय पर सोने, जागने और भोजन करने से संतुलित रहती है। देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या मानसिक तनाव तथा अनेक शारीरिक समस्याओं का कारण बनती है। उन्होंने पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण नींद, आध्यात्मिकता, सकारात्मक सामाजिक संबंध, पौष्टिक भोजन तथा आवश्यकता अनुसार चिकित्सकीय सलाह से पोषक तत्व एवं विटामिन लेने की सलाह दी। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया।
कार्यक्रम की तीसरी वक्ता डॉ. सत्य सावंत ने कहा कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए आयुर्वेद, एलोपैथी और होम्योपैथी—तीनों चिकित्सा पद्धतियों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय जीवनशैली अपनाने पर बल देते हुए कहा कि “जल्दी सोना और जल्दी उठना” का सिद्धांत आज भी उत्तम स्वास्थ्य की कुंजी है। उन्होंने शाम का भोजन लगभग 7 बजे तक कर लेने, समय-समय पर उपवास रखने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उनके अनुसार संतुलित आहार, समय पर भोजन और अनुशासित जीवनशैली से मन प्रसन्न रहता है तथा तनाव स्वतः कम होने लगता है।
कार्यक्रम का प्रारंभ करते हुए क्लब के महासचिव डॉ. जे. के. डांग ने कहा कि आयु केवल एक संख्या है, जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण ही हमें युवा बनाए रखता है। उन्होंने डॉ. प्रज्ञा कौशिक का परिचय देते हुए बताया कि वे मीडिया शिक्षा, डिजिटल साक्षरता एवं व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र की प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं तथा देशभर में अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुकी हैं। वह गूगल द्वारा ए आई चैंपियन के रूप में सम्मानित भी हो चुकी हैं।
अध्यक्षता करते हुए क्लब के प्रधान डॉ. एस. के. अग्रवाल ने तीनों वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसे प्रेरक एवं उपयोगी व्याख्यान समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि वानप्रस्थ वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसा सशक्त मंच है, जहाँ वे मिलकर तनावमुक्त, सक्रिय और आनंदपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
कार्यक्रम में लगभग 40 सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा तीनों वक्ताओं का तालियों की गड़गड़ाहट से अभिनंदन एवं धन्यवाद किया।







