श्रीराम मंदिर के लुटेरों पर चले बुलडोजर

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डॉ. हरीशकुमार सिंह

मंदिरों में चोरी और घोटालों का पुराना इतिहास

अपने देश में हजारों की संख्या में प्रसिद्ध मंदिर हैं जो श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं। भक्तजन मंदिरों में दान देकर, नगद अथवा सोने-चांदी की वस्तुएं चढ़ाकर पुण्य अर्जित करना अपना सौभाग्य मानते हैं। छोटे मंदिरों में यही चढ़ावा उनके रखरखाव और पुजारियों के जीवनयापन का प्रमुख साधन होता है। बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों के लिए ट्रस्ट गठित हैं, जबकि कई मंदिर सरकारी प्रशासन के अधीन संचालित होते हैं।

मंदिरों में चोरी का इतिहास भी काफी पुराना रहा है। अधिकांश मामलों में चोरों का निशाना अष्टधातु, पीतल, सोने-चांदी की प्राचीन मूर्तियां और आभूषण होते हैं। मंदिर कर्मचारियों द्वारा चढ़ावे की राशि में हेराफेरी के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

तिरुपति और महाकाल मंदिर के चर्चित मामले

वर्ष 2023 में तिरुपति बालाजी मंदिर के कर्मचारी रवि कुमार को गिरफ्तार किया गया था, जिस पर दो दशकों में सौ करोड़ रुपये से अधिक की नगदी चोरी करने का आरोप लगा था। वर्ष 2024 में तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था।

इसी प्रकार उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दिसंबर 2024 में वीआईपी दर्शन व्यवस्था के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि मंदिर समिति से जुड़े कुछ कर्मचारी, निजी सुरक्षा एजेंसी के गार्ड और अन्य लोग श्रद्धालुओं से अवैध रूप से धन लेकर विशेष दर्शन करा रहे थे।

अयोध्या के राम मंदिर में मामला अलग और गंभीर

अयोध्या के श्रीराम मंदिर का मामला इन घटनाओं से अलग और कहीं अधिक गंभीर बताया जा रहा है। आरोप केवल किसी एक कर्मचारी पर नहीं हैं, बल्कि यह एक संगठित तंत्र द्वारा किए गए कथित गबन और चोरी का मामला प्रतीत होता है।

बताया जा रहा है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी के अलावा सोने-चांदी की बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। यदि आरोप सत्य सिद्ध होते हैं तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात भी होगा।

पुराने आरोपों की भी होनी चाहिए जांच

आम आदमी पार्टी ने जून 2021 में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख व्यक्तियों पर भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उस समय इन आरोपों को खारिज कर दिया गया था और कहा गया था कि भूमि की खरीद तत्कालीन बाजार दरों के अनुसार की गई थी।

मंदिर निर्माण के दौरान भी विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के आरोप समय-समय पर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर उठते रहे हैं। ऐसे में यदि वर्तमान आरोपों की निष्पक्ष जांच हो रही है तो पुराने विवादों की भी जांच आवश्यक प्रतीत होती है।

राम मंदिर केवल भवन नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था है

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक क्षण पूरे देश ने उत्सव की तरह मनाया था। सदियों के संघर्ष, आंदोलनों और बलिदानों के बाद निर्मित यह मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है।

ऐसे में यदि मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार या गबन के आरोप लगते हैं तो उसका प्रभाव केवल संबंधित व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे मंदिर, ट्रस्ट और सरकार की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है।

दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई

राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। अब सबकी निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह मामला केवल धन की चोरी का नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की चोरी का है। इसलिए दोषियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। जनता की अपेक्षा है कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे उसके कृत्यों की उचित सजा मिलेगी।

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Author: Bharat Sarathi

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