Big Basket और D-Mart के नाम पर साइबर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

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18 मोबाइल फोन और एक टैब बरामद, फेसबुक विज्ञापनों के जरिए लोगों को बनाते थे शिकार

फर्जी .APK फाइल और पेमेंट लिंक भेजकर बैंक खातों से उड़ाते थे रकम, दिल्ली से संचालित हो रहा था साइबर ठगी का नेटवर्क

गुरुग्राम, 24 जून। गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने Big Basket और D-Mart के नाम पर फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन और एक टैब बरामद किया है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा रहा था।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार 21 फरवरी 2026 को थाना साइबर अपराध मानेसर में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फेसबुक पर ऑनलाइन सामान बेचने के नाम पर चलाए जा रहे विज्ञापन के माध्यम से उसे फर्जी पेमेंट लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने के बाद उसका मोबाइल फोन हैक हो गया और उसके बैंक खाते से 56,650 रुपये की धोखाधड़ी कर ली गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान साइबर अपराध मानेसर की टीम ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 23 जून 2026 को दिल्ली के न्यू अशोक नगर स्थित ए-ब्लॉक में छापेमारी की। यहां Big Basket और D-Mart के नाम पर संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ, जहां से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज कुमार (27) निवासी नालंदा, बिहार; प्रशांत कुमार (28) निवासी मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश; करण (19) निवासी शेखपुरा, बिहार; सोनू (24) निवासी शेखपुरा, बिहार तथा अखिल अहमद (28) निवासी बिजनौर, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फेसबुक पर Big Basket और D-Mart के नाम से फर्जी विज्ञापन प्रसारित करते थे। विज्ञापनों के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित कर उनसे संपर्क स्थापित किया जाता था। इसके बाद सत्यापन, रजिस्ट्रेशन अथवा ऑनलाइन खरीदारी के बहाने लोगों को .APK फाइलें और फर्जी लिंक भेजे जाते थे। इन लिंक और फाइलों के जरिए मोबाइल फोन तथा बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कॉल सेंटर में नौकरी के रूप में काम कर रहे थे और उन्हें इस कार्य के बदले वेतन दिया जाता था। बरामद मोबाइल फोन और टैब की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इनके नेटवर्क और अन्य संभावित साइबर अपराधों का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और संभावना है कि इनके माध्यम से देशभर में हुई कई अन्य साइबर ठगी की वारदातों का भी खुलासा हो सकता है। मामले की जांच जारी है।

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Author: Bharat Sarathi

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