चैनत गांव में पुलिस कार्रवाई की किसान सभा ने की निंदा, स्थायी जल समाधान की मांग

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चंडीगढ़, 25 जून। अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा राज्य कमेटी ने हांसी के चैनत गांव में पीने के पानी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों पर आधी रात को की गई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। किसान सभा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने अश्रुगैस के गोले दागकर और लाठीचार्ज कर ग्रामीणों का दमन किया तथा बाद में पानी की पाइपलाइन पर लगाई गई टी (कनेक्शन) को भी हटा दिया।

किसान सभा के राज्य प्रधान बलबीर सिंह, महासचिव सुमित दलाल और राज्य कमेटी सदस्य सरबत सिंह पूनिया ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि चैनत गांव के लोग पिछले लगभग डेढ़ महीने से पीने के पानी की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता के चलते ग्रामीणों को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक करनी पड़ी। उनके अनुसार, भूख हड़ताल के 11 दिन बाद रात के समय पाइपलाइन में टी लगाई गई, लेकिन अगले ही दिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उसे उखाड़ दिया गया।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं तक पर लाठीचार्ज किया गया और अश्रुगैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना हरियाणा सरकार और जिला प्रशासन की विफलता को उजागर करती है। किसान सभा ने सवाल उठाया कि यदि पाइपलाइन में टी लगाई गई थी तो यह प्रशासन की जानकारी के बिना कैसे संभव हुआ और यदि इसे लगाने की व्यवस्था सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े लोगों ने की थी तो फिर ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमे क्यों दर्ज किए गए।

नेताओं ने कहा कि प्रशासन आज तक इस पूरे मामले पर संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा है। उनका कहना है कि चैनत गांव ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर रूप धारण कर चुका है और सरकार लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल रही है।

राज्य कमेटी सदस्य सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि किसान सभा चैनत गांव के आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है और ग्रामीणों की मांगों की जीत तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन निर्णायक जीत के लिए आंदोलन में शामिल है और आगे भी रहेगा।

किसान सभा ने सरकार और जिला प्रशासन से ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, दमनात्मक कार्रवाई बंद करने तथा गांव की संघर्ष समिति के साथ वार्ता कर पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जनता की जायज मांगों को बल प्रयोग से नहीं बल्कि संवाद और ठोस योजनाओं के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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