जब सरकार किसानों को कानून के अनुसार मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है तो किसान अपनी जमीन आईएमटी जैसी परियोजनाओं के लिए कौड़ियों के भाव क्यों सौंपें? विद्रोही
रेवाड़ी, 22 जून। स्वंयसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेद प्रकाश विद्रोही ने कोसली-रेवाड़ी क्षेत्र में इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) स्थापित करने के लिए किसानों से जमीन देने की उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह की अपील पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हरियाणा सरकार वास्तव में आईएमटी बनाने को लेकर गंभीर है तो उसे सबसे पहले किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के अनुसार मुआवजा देने का निर्णय लेना चाहिए।
विद्रोही ने कहा कि किसानों को कानूनन मिलने वाले मुआवजे के बजाय औने-पौने दामों पर जमीन खरीदकर आईएमटी विकसित करने की योजना सफल नहीं हो सकती। उनका आरोप है कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में औद्योगिक विकास चाहती तो जमीन प्राप्त करने के लिए पोर्टल आधारित प्रक्रिया का सहारा लेने के बजाय भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करती।
उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। सरकार यह भलीभांति जानती है कि उसकी निर्धारित शर्तों पर किसान सस्ती दरों में अपनी जमीन देने को तैयार नहीं होंगे। ऐसे में भविष्य में आईएमटी परियोजनाओं के ठप पड़ने का दोष भी किसानों पर मढ़ा जा सकता है।
वेद प्रकाश विद्रोही ने उदाहरण देते हुए कहा कि करीब दस वर्ष पूर्व निजामपुर-नारनौल क्षेत्र में मल्टी स्पेशियलिटी लॉजिस्टिक हब स्थापित करने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक यह परियोजना जमीन उपलब्ध न होने और मुआवजा विवाद के कारण अधर में लटकी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इस कानून के अनुरूप मुआवजा देने को तैयार नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार किसानों को कानून के अनुसार मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं है तो किसान अपनी जमीन आईएमटी जैसी परियोजनाओं के लिए कौड़ियों के भाव क्यों सौंपें? विद्रोही ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा करते हुए पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण करने की मांग की।








