भूपेन्द्र सिंह हुड्डा SIR को लेकर मंगलवार को गुरुग्राम में BLA ट्रैनिंग कार्यक्रम में लेंगे हिस्सा

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·        कच्चे कर्मियों को अधिसूचना के लगभग 2 साल बाद भी नहीं मिला जॉब सिक्यूरिटी लेटर- हुड्डा

चंडीगढ़, 20 जून। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा के एक के बाद एक सारे झूठ उजागर होते जा रहे हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में कच्चे कर्मचारियों का वोट लेने के लिए 1,25,000  कौशल कर्मियों को पक्का करने का ऐलान किया था। इसके लिए बाकायदा अधिसूचना जारी करने का भी ड्रामा रचा गया। सरकार ने 15 अगस्त 2024 को, चुनाव से ठीक पहले नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन लगभग  2 साल बाद भी, आज तक इन कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का कोई कानून या आधिकारिक पत्र नहीं मिला है।

इसी वजह से इन तमाम कर्मचारियों के सिर पर हमेशा नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। आए दिन किसी न किसी बहाने से सरकार इन कौशल कर्मियों को नौकरी से निकालती रहती है।

जबकि, कांग्रेस सरकार के दौरान कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए बनी वाली नियमितीकरण की नीति पर कुछ दिन पहले ही हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुहर लग चुकी है। कांग्रेस सरकार की उस नीति को अदालत ने पूरी तरह वैध माना है। इस नीति से गेस्ट टीचर्स समेत हजारों कच्चे कर्मचारियों को लाभ मिला है। लेकिन, भाजपा अपने साढ़े 11 साल के शासनकाल में आज तक नियमितीकरण की कोई ऐसी नीति नहीं बना सकी। इसका खामियाजा इन कच्चे कर्मचारियों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली में पत्रकारों के सवालों के जवाब में आगे कहा कि कांग्रेस का मजबूत संगठन लगभग तैयार हो चुका है। संगठन का विस्तार गांव-गांव और बूथ तक किया जाएगा। SIR को लेकर लगातर पार्टी की मीटिंग्स चल रही हैं। सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को इसपर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी सही वोट कटे नहीं और कोई भी फर्जी वोट जुड़े नहीं। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में ट्रेनिंग कार्यक्रम में मंगलवार को गुरुग्राम में शामिल होंगे।

पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में सांसदों के टूटने को लेकर हुड्डा ने कहा कि यह प्रजातंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है। क्योंकि, जो व्यक्ति जिस पार्टी से जीत कर आया, अगर वो पाला बदलता है, तो जनता के वोट का कोई महत्व रह ही नहीं जाता। अगर किसी को पार्टी बदलनी है तो उसे पहले अपनी सीट से इस्तीफा देना चाहिए।

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Author: Bharat Sarathi

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