त्रिखा की पुस्तक ‘मेरी झंड ज़िंदगी’ का हुआ विमोचन

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एनएसडी परिसर में हुआ लोकार्पण, रंगमंच और साहित्य जगत की हस्तियों ने सराहा कहानी संग्रह

रोहतक। जाने-माने रंगकर्मी एवं थिएटर प्रमोटर विश्व दीपक त्रिखा की कहानियों के संग्रह ‘मेरी झंड ज़िंदगी’ का विमोचन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रांगण में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर नाट्य समीक्षक अनिल गोयल, रामजी बाली, नाट्य निर्देशक श्याम कुमार, अविनाश सैनी, पारुल आहुजा तथा यतिन वधवा सहित अनेक साहित्य एवं रंगमंच प्रेमी उपस्थित रहे।

पुस्तक के विमोचन अवसर पर बोलते हुए चितरंजन त्रिपाठी ने कहा कि नाटक को आम जनमानस के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों के जीवन से जुड़ी कहानियों का मंचीय प्रस्तुतीकरण एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व दीपक त्रिखा की कहानियां जीवन की कड़वी सच्चाइयों और गंभीर विषयों को भी बेहद सहज, रोचक और हास्यपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती हैं।

नाट्य समीक्षक अनिल गोयल ने कहा कि स्वयं पर कटाक्ष करना एक कठिन कला है, जिसे विश्व दीपक त्रिखा ने अपनी कहानियों में प्रभावशाली ढंग से निभाया है। उन्होंने कहा कि यह कहानियां पाठक को आरंभ से अंत तक बांधे रखती हैं और सीधे उसके अंतर्मन को स्पर्श करती हैं।

इस अवसर पर रामजी बाली ने कहा कि नए हिंदी नाटकों की सीमित उपलब्धता के दौर में यह पुस्तक नाटक के विद्यार्थियों और विशेष रूप से एकल अभिनय करने वाले कलाकारों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। वहीं नाट्य निर्देशक श्याम कुमार ने घोषणा की कि वे पुस्तक की कहानियों को शीघ्र ही रंगमंच पर प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्यकारों और रंगकर्मियों ने विश्व दीपक त्रिखा को पुस्तक प्रकाशन के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ‘मेरी झंड ज़िंदगी’ पाठकों और रंगमंच प्रेमियों के बीच विशेष पहचान बनाएगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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