काले बिल्ले लगाकर कर्मचारियों ने जताया विरोध, निजीकरण की नीतियां वापस लेने की मांग
एग्री डिस्काम और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को कर्मचारियों ने बताया जनविरोधी
गुरुग्राम-नूंह की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने की तैयारी का आरोप

गुरुग्राम, 16 जून। ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशंस वर्कर यूनियन के आह्वान पर सोमवार को प्रदेशभर में एग्री डिस्काम बनाने, स्मार्ट मीटर लगाने तथा गुरुग्राम एवं नूंह जिलों की बिजली आपूर्ति के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने के प्रस्ताव के विरोध में सभी सब-यूनिट कार्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
यूनियन के राज्य सचिव सुशील शर्मा और राज्य उपाध्यक्ष सरोज ने कहा कि हरियाणा सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़े बिजली कनेक्शनों और लाइनों को अलग करने के लिए एग्री डिस्काम कंपनी बनाने की योजना पर काम कर रही है। उनका आरोप है कि यह कदम भविष्य में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) के निजीकरण का रास्ता तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि सरकारी विभाग जनता के करों से विकसित किए गए हैं ताकि लोगों को सस्ती और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। ऐसे में बिजली क्षेत्र का निजीकरण न तो आम जनता के हित में है और न ही कर्मचारियों के हित में। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को बड़े पूंजीपतियों के हवाले करने की दिशा में काम कर रही है।

गुरुग्राम सर्कल सचिव अमरजीत जाखड़ और सचितानंद ने कहा कि स्मार्ट मीटर लागू करने से रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे और प्रदेश के शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर कम हो जाएंगे। उन्होंने आशंका जताई कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद अलग-अलग समय पर अलग-अलग दरों से बिजली शुल्क वसूला जा सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार गुरुग्राम और नूंह जिले की बिजली व्यवस्था के संचालन के लिए निजी कंपनियों को लाइसेंस देकर बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एग्री डिस्काम, स्मार्ट मीटर और बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से प्रस्तावित नीतियों को वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।








