भाजपा पर लोकतांत्रिक इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप
रेवाडी, 16 जून 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि भाजपा सत्ता के प्रभाव का उपयोग कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिमामंडन करने के लिए न केवल इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ कर रही है, बल्कि देश और दुनिया के सामने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की भ्रामक तस्वीर भी प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं को ठेस पहुंच रही है।
विद्रोही ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर भाजपा को अपनी उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार करने और जश्न मनाने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके लिए इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना और तथ्यात्मक रूप से गलत दावे करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए गंभीर अपराध और “लोकतांत्रिक पाप” की संज्ञा दी।
उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से लेकर 27 मई 1964 तक लगातार 6131 दिनों (16 वर्ष, 9 माह और 12 दिन) तक प्रधानमंत्री पद पर रहे। इसके विपरीत, नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 से 16 जून 2026 तक लगभग 4406 दिन प्रधानमंत्री के रूप में पूरे किए हैं। ऐसे में मोदी को देश का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाला नेता बताना तथ्यों और इतिहास दोनों के साथ खिलवाड़ है।
विद्रोही ने सवाल किया कि जब नेहरू 6131 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे और मोदी का कार्यकाल अभी 4406 दिनों का है, तो भाजपा और उसके समर्थक मीडिया किस आधार पर मोदी को सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाला नेता बता रहे हैं? उन्होंने कहा कि यदि 15 अगस्त 1947 से 9 जून 1952 तक के 1733 दिनों को नेहरू के कार्यकाल में शामिल नहीं माना जाता, तो भाजपा और उसके समर्थकों को स्पष्ट करना चाहिए कि उस अवधि में भारत का प्रधानमंत्री कौन था।
उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि सरदार वल्लभभाई पटेल किस प्रधानमंत्री की सरकार में गृहमंत्री थे और स्वतंत्र भारत की पहली सरकार का नेतृत्व किसने किया था। उनके अनुसार, स्वतंत्रता के बाद से लेकर पहले आम चुनाव तक प्रधानमंत्री पद पर नेहरू की भूमिका को नकारना इतिहास के साथ अन्याय है।
विद्रोही ने भाजपा के उस दावे को भी तथ्यहीन बताया जिसमें कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी लगातार तीन आम चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में लगातार जीत हासिल कर प्रधानमंत्री पद संभाला था और अपने निधन तक इस पद पर बने रहे। ऐसे में मोदी को इस उपलब्धि का पहला उदाहरण बताना भी ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है।
ग्रामीण भारत अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक उपलब्धियों का मूल्यांकन तथ्यों और वास्तविक कार्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि इतिहास को बदलकर किसी व्यक्ति विशेष का महिमामंडन करने से। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि वह राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनने के बजाय ऐतिहासिक तथ्यों और सत्य को जनता के सामने रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाए।









