16 वर्षों से अधिवक्ताओं के चैंबरों की मांग लंबित, ‘टॉवर ऑफ जस्टिस’ निर्माण में भी भारी देरी

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2010 में हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी के एजेंडे में शामिल था भूमि आवंटन का मुद्दा, अब तक नहीं हुआ समाधान : चौधरी संतोख सिंह

गुरुग्राम, 14 जून। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने राज्य सरकार से मांग की है कि गुरुग्राम के अधिवक्ताओं के लिए चैंबर्स के निर्माण हेतु तत्काल पर्याप्त भूमि आवंटित की जाए तथा वर्षों से लंबित पड़ी “टॉवर ऑफ जस्टिस” (न्यू ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स) परियोजना का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा कराया जाए।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि पिछले लगभग 16 वर्षों से गुरुग्राम के अधिवक्ता चैंबर्स हेतु भूमि आवंटन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, गुरुग्राम में अधिवक्ताओं के चैंबर एवं पार्किंग के लिए भूमि आवंटन का मामला 16 मार्च 2010 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की बिल्डिंग कमेटी की बैठक के एजेंडा में शामिल था। 12 मार्च 2010 को जारी बैठक नोटिस में भी इस विषय को विशेष रूप से सूचीबद्ध किया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि यह मांग डेढ़ दशक से अधिक समय से लंबित चली आ रही है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला बार गुरुग्राम के लगभग 11 हजार पंजीकृत अधिवक्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवा एवं नए वकीलों की है। अधिकांश अधिवक्ताओं के पास न तो अपना चैंबर है और न ही मुकदमों की तैयारी, दस्तावेजों के प्रबंधन तथा मुवक्किलों से चर्चा के लिए उपयुक्त कार्यस्थल उपलब्ध है।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि अधिवक्ता न्याय प्रणाली का अभिन्न एवं महत्वपूर्ण अंग हैं। यदि न्याय व्यवस्था को प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित बनाना है तो अधिवक्ताओं को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि “टॉवर ऑफ जस्टिस” परिसर के साथ-साथ अधिवक्ताओं के चैंबर्स के निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि आरक्षित एवं आवंटित की जाए।

उन्होंने कहा कि चैंबरों की अनुपलब्धता केवल अधिवक्ताओं की कार्यक्षमता को प्रभावित नहीं कर रही, बल्कि इसका प्रतिकूल प्रभाव संपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है। यदि अधिवक्ताओं को उचित कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाए तो वे अधिक प्रभावी ढंग से अपने मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे तथा न्यायिक कार्यों का निष्पादन अधिक सुव्यवस्थित और दक्षतापूर्वक हो सकेगा।

चौधरी संतोख सिंह ने बताया कि गुरुग्राम की न्यायिक व्यवस्था आज भी अस्थायी भवनों और पोर्टा केबिनों के सहारे संचालित हो रही है। न्यायालय परिसर के रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना के बाद न्यायिक कार्य विभिन्न स्थानों पर बिखर गए हैं। वर्तमान में कुछ न्यायालय पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, कुछ लेबर कोर्ट भवन, कुछ विकास सदन तथा कुछ विकास सदन के निकट स्थापित पोर्टा केबिनों से संचालित किए जा रहे हैं। इस स्थिति के कारण अधिवक्ताओं और वादकारियों को अपने मामलों की पैरवी के लिए विभिन्न स्थानों पर बार-बार जाना पड़ता है, जिससे समय, श्रम और संसाधनों की अनावश्यक हानि होती है।

उन्होंने कहा कि “टॉवर ऑफ जस्टिस” का शिलान्यास 22 फरवरी 2014 को किया गया था तथा इसे वर्ष 2020 तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित था। दुर्भाग्यवश वर्ष 2026 तक भी यह महत्वपूर्ण परियोजना अधूरी पड़ी है। इसका सीधा प्रभाव न्यायिक कार्यप्रणाली, मामलों के समयबद्ध निस्तारण और आम नागरिकों को मिलने वाली न्यायिक सुविधाओं पर पड़ रहा है।

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि बेहतर न्यायिक अधोसंरचना केवल अधिवक्ताओं की आवश्यकता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के न्याय पाने के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और लाखों नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए “टॉवर ऑफ जस्टिस” के निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए। साथ ही गुरुग्राम में अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके चैंबरों के निर्माण एवं आवंटन के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं जनहितकारी बनाया जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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