गुड़गांव, 12 जून। एआईयूटीयूसी (AIUTUC) गुड़गांव कमेटी ने रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की तैयारियों को मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों तथा आम जनता के हितों पर सीधा हमला बताया है। संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि इसका आर्थिक बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
एआईयूटीयूसी के जिला सचिव कॉमरेड श्रवण कुमार गुप्ता और जिला अध्यक्ष कॉमरेड रामकुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों ने पहले से महंगाई से जूझ रहे मेहनतकश परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही, जबकि आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
नेताओं ने हरियाणा में गुड़गांव और नूंह जिलों की बिजली वितरण व्यवस्था को निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को सौंपने की प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण सार्वजनिक सेवाओं को कमजोर करने और उन्हें मुनाफाखोर कंपनियों के हवाले करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने दावा किया कि निजीकरण के बाद बिजली दरों में वृद्धि, सेवाओं का व्यापारीकरण और कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
एआईयूटीयूसी नेताओं के अनुसार बिजली विभाग के हजारों कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां लाभ बढ़ाने के लिए छंटनी, ठेका प्रथा और श्रम अधिकारों में कटौती जैसे कदम उठाती हैं, जिसका सीधा असर श्रमिकों और उनके परिवारों पर पड़ता है। वहीं उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
कॉमरेड श्रवण कुमार गुप्ता ने कहा कि बिजली और रसोई गैस जैसी बुनियादी सेवाएं आम जनता की जरूरतों से जुड़ी हैं और इन्हें लाभ कमाने के उद्देश्य से निजी कंपनियों के हवाले नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से जनहित को प्राथमिकता देने की मांग की।
एआईयूटीयूसी गुड़गांव कमेटी ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड के आवेदन को तत्काल खारिज करने तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण की सभी योजनाओं पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने रसोई गैस की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को भी वापस लेने की मांग उठाई।
संगठन ने मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों, बिजली उपभोक्ताओं और जनवादी संगठनों से इन नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान करते हुए कहा कि एआईयूटीयूसी इस मुद्दे पर व्यापक जनजागरण अभियान और आंदोलन चलाएगी तथा अन्य संगठनों के साथ मिलकर संयुक्त संघर्ष को मजबूत करेगी।








