भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता के लेख पर पर्ल चौधरी का जवाब
पर्ल चौधरी
अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस

भाजपा की नई प्रदेश अध्यक्षडा. अर्चना गुप्ता द्वारा मोदी सरकार के 12 वर्षों को “गौरवशाली विकास यात्रा” बताने वाला लेख पढ़कर ऐसा लगा मानो वह किसी और भारत की तस्वीर पेश कर रही हों। जिस भारत में आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा संकट, स्वास्थ्य अव्यवस्था और कानून व्यवस्था की बदहाली से जूझ रही है, उस भारत का उल्लेख उनके पूरे लेख में कहीं दिखाई नहीं देता।
सवाल यह है कि क्या विकास केवल विज्ञापनों, भाषणों और उद्घाटनों से होता है या फिर जनता के जीवन में वास्तविक सुधार से?
मोदी सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया था, लेकिन आज देश का हर नागरिक देख रहा है कि सत्ता का लाभ कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों और भाजपा के करीबी लोगों तक सीमित होकर रह गया है। छोटे व्यापारी, किसान, युवा, कर्मचारी और मध्यम वर्ग लगातार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। देश की संपत्तियों के निजीकरण का सिलसिला लगातार जारी है। सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर किया गया और देश की आर्थिक नीतियां कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हितों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आईं।
भाजपा दावा करती है कि उसने भारत की संस्कृति को मजबूत किया है, जबकि सच्चाई यह है कि पिछले 12 वर्षों में समाज में विभाजन, नफरत और वैमनस्य की राजनीति को बढ़ावा मिला है। भारत की हजारों वर्षों पुरानी गंगा-जमुनी संस्कृति, भाईचारा और सामाजिक समरसता को सबसे अधिक आघात इसी दौर में पहुंचा है।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं से लेकर नीट, जेईई और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं तक पेपर लीक आम बात बन चुके हैं। लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में झूल रहा है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं। निराशा का आलम यह है कि कई युवा मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।
हरियाणा की स्थिति भी भाजपा के दावों से बिल्कुल अलग है। गुरुग्राम, जो देश की आर्थिक राजधानी कहलाता है, वहां आज भी एक आधुनिक और पर्याप्त क्षमता वाला सरकारी सिविल अस्पताल नहीं है। पटौदी और फरुखनगर जैसे क्षेत्रों के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव है। कई स्थानों पर अल्ट्रासाउंड जैसी सामान्य चिकित्सा सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। यह कैसा स्वास्थ्य मॉडल है जिसकी भाजपा प्रशंसा कर रही है?
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भाजपा सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। बेटियों के खिलाफ अपराध लगातार सामने आ रहे हैं। “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली सरकार के कार्यकाल में लिंगानुपात सुधार की गति थम गई है और कई क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की जा रही है। महिलाओं के लिए सुरक्षा, सम्मान और अवसरों के दावे आंकड़ों और विज्ञापनों से आगे नहीं बढ़ पाए।
दलितों और पिछड़े वर्गों के उत्थान की बात करने वाली भाजपा को यह भी बताना चाहिए कि सरकारी विभागों में आरक्षित वर्गों के हजारों पद वर्षों से खाली क्यों पड़े हैं? कई भर्ती प्रक्रियाओं में योग्य उम्मीदवारों को “नॉट फिट” बताकर बाहर कर दिया जाता है। सामाजिक न्याय केवल भाषणों का विषय बनकर रह गया है।
अगर विकास का सबसे बड़ा प्रमाण भाजपा के दफ्तरों का निर्माण और नेताओं की संपत्ति में वृद्धि है, तो निश्चित रूप से भाजपा सफल रही है। लेकिन यदि विकास का पैमाना आम जनता का जीवन स्तर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा है, तो भाजपा सरकार को जवाब देना होगा।
गुरुग्राम जिले का उदाहरण ही पर्याप्त है। सांसद भाजपा का, विधायक भाजपा के, मेयर भाजपा का, परिषद अध्यक्ष भाजपा का — यानी तथाकथित “ट्रिपल इंजन सरकार”। लेकिन जनता पूछ रही है कि विकास कहां है? सड़कें टूटी हुई हैं, सीवर व्यवस्था चरमराई हुई है, जलभराव आम समस्या है और भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आती हैं।
मानेसर नगर निगम तो भाजपा मॉडल की विफलता का प्रतीक बन चुका है। निगम के गठन से लेकर आज तक भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लगते रहे हैं। पहले अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे और अब भाजपा के ही मेयर तथा सीनियर डिप्टी मेयर सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को इन शिकायतों की जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
मोदी सरकार के 12 वर्षों की वास्तविक तस्वीर विज्ञापन नहीं, बल्कि महंगाई से परेशान गृहिणी, रोजगार की तलाश में भटकता युवा, कर्ज में दबा किसान, सुविधाओं के अभाव में इलाज करवाता मरीज और असुरक्षित महसूस करती महिला दिखाती है।
देश को प्रचार नहीं, जवाब चाहिए। जनता को नारों नहीं, परिणाम चाहिए। भाजपा के 12 सालों का मूल्यांकन पोस्टरों और सरकारी विज्ञापनों से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से होगा। और यही वास्तविकता भाजपा के विकास के दावों पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है।
आज आवश्यकता आत्ममंथन की है, आत्मप्रशंसा की नहीं। भारत और हरियाणा का भविष्य केवल प्रचार से नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और जनहित की राजनीति से मजबूत होगा।









