सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसान हित में ऐतिहासिक, भाजपा की भूमि नीति पर करारा प्रहार : विद्रोही

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बसीरपुर, तलोट और घाटासेर के किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत मुआवजा देने के आदेश से प्रदेशभर के प्रभावित किसानों को मिली नई उम्मीद

चंडीगढ़/रेवाडी, 6 जून 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने जिला महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव बसीरपुर, तलोट और घाटासेर में मल्टी स्पेशियलिटी लॉजिस्टिक हब के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे किसान हित में एक ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे किसानों के अधिकारों को मजबूती मिली है।

विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद हरियाणा सहित भाजपा शासित राज्यों में किसानों की जमीनों के अधिग्रहण के दौरान भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 की भावना की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर नियम बनाकर किसानों की जमीनें कम कीमतों पर अधिग्रहित करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि नारनौल क्षेत्र में प्रस्तावित लॉजिस्टिक हब के लिए हरियाणा सरकार ने बसीरपुर, तलोट और घाटासेर गांवों के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था तथा मुआवजा लैंड कंसोलिडेशन एक्ट-2017 के तहत देने का निर्णय लिया था। किसानों ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के तहत मुआवजे की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

विद्रोही ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के अनुसार देने का आदेश दिया है। यह फैसला न केवल संबंधित किसानों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि हरियाणा में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में भी एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से उन सभी किसानों को भी बल मिलेगा जिनकी जमीनें प्रदेश में लैंड कंसोलिडेशन एक्ट-2017 के तहत अधिग्रहित की गई हैं। अब ऐसे किसानों के लिए भी भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के अनुरूप उचित मुआवजे की मांग करने का रास्ता खुल गया है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला किसानों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता है और भविष्य में किसानों की जमीनों के अधिग्रहण में पारदर्शिता तथा न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निर्णय के बाद सरकारें किसानों के हितों की अनदेखी करने से बचेंगी और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कानून के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करेंगी।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!