थाईलैंड में PFTI इंटरनेशनल बिजनेस एंड लीडरशिप एक्सचेंज डेलिगेशन 2026 की ऐतिहासिक सफलता

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

थाईलैंड में उच्चस्तरीय बैठकों से भारतीय एमएसएमई, आयुर्वेद, ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक विस्तार का अवसर

गुरुग्राम/बैंकॉक। भारत की प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं व्यापारिक संस्था प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री(PFTI) द्वारा आयोजित “PFTI इंटरनेशनल बिजनेस एंड लीडरशिप एक्सचेंज डेलिगेशन 2026” ने थाईलैंड में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए भारत और थाईलैंड के बीच व्यापार, निवेश, उद्योग और ई-कॉमर्स सहयोग को नई दिशा प्रदान की है। इस पहल से भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों में प्रवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

भारत से गए प्रतिनिधिमंडल में एफटीआई के चेयरमैन दीपक मैनी, वाइस चेयरमैन डॉ. एस.पी. अग्रवाल, डायरेक्टर जनरल एडवोकेट आर.एल. शर्मा, डायरेक्टर डॉ. अंशुल ढींगरा, गुरुग्राम चैप्टर के प्रेसिडेंट पी.के. गुप्ता, कोर टीम सदस्य कंवर सिंह एवं दिनेश कुमार शामिल रहे।

थाईलैंड में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों और बोर्डरूम चर्चाओं में ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी, आयुर्वेद, हर्बल उत्पाद, मिलेट्स, हेल्दी फूड, ई-कॉमर्स, डिजिटल ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधिमंडल की विशेष मुलाकात इंडियन थाई चैंबर ऑफ कॉमर्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीमती बीना होरा से हुई। उन्होंने भारतीय उद्योगों को थाईलैंड के व्यापारिक इकोसिस्टम, स्थानीय नेटवर्किंग और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों में प्रवेश संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

उन्होंने कहा कि यदि भारतीय एमएसएमई सही रणनीति, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और मजबूत स्थानीय साझेदारियों के साथ आगे बढ़ें, तो थाईलैंड एशियाई बाजारों तक पहुँचने का एक प्रभावी व्यापारिक प्रवेश द्वार बन सकता है।

बैठक में विशेष अतिथि के रूप में शामिल प्रसिद्ध थाई व्यवसायी निरंजन त्रिपाठी (निक) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, संस्कृति और दीर्घकालिक संबंधों की मजबूत नींव पर आधारित होता है। उन्होंने भारतीय उद्यमियों को स्थानीय व्यापारिक संस्कृति को समझने और समाज से जुड़ने की सलाह दी।

थाईलैंड में लंबे समय से सफलतापूर्वक व्यापार कर रहे अजय प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, हर्बल उत्पादों, मिलेट्स और भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए थाईलैंड में व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि “शॉपी”, “लज़ाडा”, “लाइन शॉपिंग” और “टेमू” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय एमएसएमई को वैश्विक ग्राहकों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

चर्चा के दौरान यह निष्कर्ष भी सामने आया कि भारत और थाईलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए दोनों देशों को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर दीर्घकालिक साझेदारी, पारस्परिक विश्वास और स्थानीय जुड़ाव पर आधारित रणनीति अपनानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यही दृष्टिकोण भविष्य में दोनों देशों के उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूत बनाएगा।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संवाद और सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-थाईलैंड व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देगा तथा उद्योग, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में अनेक नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। पीएफटीआई ने इस दिशा में भविष्य में भी सक्रिय भूमिका निभाने और दोनों देशों के उद्योगों को एक साझा मंच पर लाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!