हिसार में प्रतिष्ठित व्यक्ति को फोन पर दी गई धमकी से समाज में आक्रोश
विभाजन की पीड़ा झेलने वाले समाज के सम्मान पर चोट:
पंजाबी समाज’रिफ्यूजी’ और ‘पाकिस्तानी’ जैसे शब्दों के प्रयोग को बताया सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा
दोषी की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित को सुरक्षा देने की मांग
गुरुग्राम, 4 जून। हिसार में पंजाबी समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को फोन पर कथित रूप से ‘रिफ्यूजी’ और ‘पाकिस्तानी’ कहकर अपमानित करने तथा जान से मारने की धमकी देने की घटना को लेकर पंजाबी समाज में गहरा रोष व्याप्त है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विभाजन की त्रासदी झेलकर देश निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पूरे पंजाबी समाज के सम्मान पर हमला बताया है।
समाज के लोगों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व इतिहास की वास्तविकता से अनभिज्ञ होकर इस प्रकार की आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हैं। उनका कहना है कि विभाजन के दौरान जिन परिवारों ने अपना घर-बार छोड़ा, वे अखंड भारत के नागरिक थे और देश की एकता, तिरंगे तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए भारत आए थे। ऐसे में उन्हें ‘पाकिस्तानी’ या ‘रिफ्यूजी’ कहना न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान है, बल्कि उनकी पीड़ा और बलिदान का भी अनादर है।
पंजाबी समाज ने कहा कि विभाजन के समय सब कुछ खो देने के बावजूद समाज ने कभी किसी पर बोझ बनने का मार्ग नहीं चुना। अपनी मेहनत, उद्यमशीलता और राष्ट्रभक्ति के बल पर पंजाबी समाज ने हरियाणा सहित पूरे देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कृषि, व्यापार, उद्योग और सेना जैसे क्षेत्रों में समाज की भूमिका सदैव अग्रणी रही है।
समाज ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित व्यक्ति को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा धमकी देने वाले आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही मांग की गई है कि जातीय, क्षेत्रीय अथवा सामाजिक आधार पर किसी भी समुदाय के प्रति अपमानजनक शब्दों के प्रयोग को रोकने के लिए प्रभावी और सख्त कानूनी प्रावधान किए जाएं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न वर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए विशेष कानून मौजूद हैं, उसी प्रकार किसी भी भारतीय नागरिक को उसकी सामाजिक या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के आधार पर अपमानित करने वालों के खिलाफ भी कठोर दंडात्मक व्यवस्था होनी चाहिए। समाज ने यह भी मांग की कि किसी भारतीय नागरिक को ‘पाकिस्तानी’, ‘शरणार्थी’ अथवा अन्य अपमानजनक संबोधनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के मामलों में सख्त एवं गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।
पंजाबी समाज ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते प्रभावी रोक नहीं लगाई गई और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होगा। समाज ने सभी नागरिकों से आपसी भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की।









