एसआईआर पर कांग्रेस और विपक्ष को सतर्क रहना होगा, नहीं तो मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका: विद्रोही

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“हर बूथ पर निगरानी रखे विपक्ष, मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की मनमानी न होने दें”

रेवाडी, 4 जून 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा है कि अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी 15 जून से चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। ऐसे में यदि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर निगरानी नहीं रखी, तो भविष्य के चुनावों में मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंकाओं को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है।

विद्रोही ने अपने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने वोटों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे, लेकिन उन आरोपों को प्रमाणित करने के लिए न तो व्यापक जन आंदोलन चलाया गया और न ही न्यायालयों में प्रभावी ढंग से मामला उठाया गया।

उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने अथवा संदिग्ध घोषित किए जाने के आरोप लगे थे। विद्रोही के अनुसार इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2029 के लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा हर संभव चुनावी रणनीति अपनाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भी भाजपा को लाभ पहुंचाने वाली कार्यवाहियों में सहयोग कर सकता है। उनके अनुसार चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर हरियाणा में वर्ष 2002 की मतदाता सूची और वर्तमान मतदाता सूची के बीच लगभग 37 लाख मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि इसी अंतर का उपयोग करके मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जा सकता है।

विद्रोही ने कांग्रेस, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे जून और जुलाई के दौरान एसआईआर प्रक्रिया पर विशेष नजर रखें तथा प्रत्येक बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की तैनाती सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी प्रकार की मनमानी होती है तो उसे तत्काल उजागर किया जाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में बना रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जाए। उनके अनुसार राजनीतिक दलों और नागरिक समाज की सतर्कता ही जनादेश की रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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Author: Bharat Sarathi

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