एकमुश्त निपटान योजना-2026 : व्यापारियों के लिए बकाया कर विवादों के समाधान का सुनहरा अवसर

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1 जून से 28 सितंबर तक लागू रहेगी योजना, एक लाख रुपये तक के बकाया मामलों में 100 प्रतिशत राहत

योजना का लाभ लेकर पुराने कर विवादों का निपटारा करें व्यापारी : स्नेह लता

गुरुग्राम, 31 मई। हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2025 में छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई एकमुश्त निपटान योजना को व्यापारियों का व्यापक समर्थन मिला था। प्रदेशभर में 1,15,223 व्यापारियों ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने लंबित कर मामलों का निपटारा किया। योजना की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए राज्य सरकार ने पुनः एकमुश्त निपटान योजना-2026 (ओटीएस) लागू करने का निर्णय लिया है।

संयुक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त (रेंज) गुरुग्राम स्नेह लता यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना 1 जून 2026 से 28 सितंबर 2026 तक कुल 120 दिनों के लिए प्रभावी रहेगी। योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कराधान अधिनियमों के अंतर्गत लंबित बकाया कर मामलों का समाधान करना, न्यायालयों एवं अपीलीय मंचों पर लंबित विवादों को कम करना तथा कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है।

सात कराधान अधिनियमों के बकाया देय में मिलेगी राहत

स्नेह लता यादव ने बताया कि यह योजना सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित बकाया देय राशि के निपटान का अवसर प्रदान करती है। यदि किसी करदाता पर किसी अधिनियम के अंतर्गत किसी वर्ष के लिए एक लाख रुपये तक का कर बकाया है, तो उसे योजना के तहत अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामलों में संबंधित वर्ष का कर, ब्याज एवं जुर्माना पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि करदाता अपने बकाया देय राशि के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम और किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना में पूर्ववर्ती हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत लंबित मामलों के लिए विशेष राहत का प्रावधान किया गया है। चूंकि इस अधिनियम के अंतर्गत अनेक मामले काफी पुराने हैं, इसलिए एक लाख रुपये से अधिक के कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत कर छूट प्रदान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि फॉर्म-सी, फॉर्म-एफ, फॉर्म-एच, फॉर्म-ई-1, फॉर्म-ई-2, टैक्स इनवॉइस, वैट-सी-4, वैट-डी-1, वैट-डी-2 आदि वैधानिक प्रपत्र जमा न होने के कारण बड़ी संख्या में बकाया कर मामले लंबित हैं। ऐसे मामलों के समाधान के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यापारी अब आवश्यक प्रपत्र प्रस्तुत करने में सक्षम है, तो उसे निर्धारित शर्तों के अनुसार राहत प्रदान की जाएगी। हालांकि यह लाभ फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों वाले मामलों तथा पहले से अस्वीकृत प्रपत्रों पर लागू नहीं होगा।

हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत छूट

राज्य सरकार द्वारा बकाया करदाताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से कर, ब्याज एवं जुर्माने में विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के अंतर्गत 1 रुपये से 1 लाख रुपये तक की बकाया कर राशि पर कर, ब्याज एवं जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। वहीं 1 लाख रुपये से अधिक की बकाया कर राशि पर कर में 70 प्रतिशत तथा ब्याज एवं जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।
इसी प्रकार, अन्य छह अधिनियमों के अंतर्गत 1 रुपये से 1 लाख रुपये तक की बकाया कर राशि पर कर, ब्याज एवं जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। 1 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की बकाया राशि पर कर में 60 प्रतिशत, 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक पर 50 प्रतिशत, 1 करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये तक पर 40 प्रतिशत, 10 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये तक पर 35 प्रतिशत तथा 30 करोड़ रुपये से 60 करोड़ रुपये तक की बकाया राशि पर कर में 30 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। इन सभी श्रेणियों में ब्याज एवं जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। हालांकि, 60 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया कर राशि पर कर में कोई छूट नहीं मिलेगी, लेकिन ब्याज एवं जुर्माने में 100 प्रतिशत छूट का लाभ उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि जिन मामलों में करदाता की अपील या मुकदमा किसी न्यायिक अथवा अपीलीय मंच पर लंबित है, वे भी संबंधित अपील या मुकदमा वापस लेने की शर्त पर योजना का लाभ उठा सकते हैं।

योजना के तहत निपटान राशि जमा करने के लिए किस्तों की सुविधा भी उपलब्ध

योजना के तहत निपटान राशि जमा करने के लिए किस्तों की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, 5 लाख रुपये तक की निपटान राशि पर किस्तों का लाभ नहीं मिलेगा और पूरी राशि एकमुश्त जमा करनी होगी। 5 लाख रुपये से अधिक तथा 25 लाख रुपये तक की निपटान राशि को दो समान किस्तों में जमा किया जा सकेगा, जिसमें पहली किस्त आवेदन के समय और दूसरी किस्त अंतरिम आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। वहीं, 25 लाख रुपये से अधिक की निपटान राशि के लिए तीन किस्तों का प्रावधान किया गया है। इसके तहत आवेदन के समय कुल राशि का 40 प्रतिशत, अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर 30 प्रतिशत तथा शेष 30 प्रतिशत राशि 120 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।

स्नेह लता ने कहा कि जिन मामलों में निपटान के लिए आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा, उन मामलों में करदाता के विरुद्ध आगे कोई वसूली अथवा अन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी पात्र व्यापारियों एवं करदाताओं से आग्रह किया कि वे राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने पुराने कर विवादों का समाधान करें और आर्थिक राहत प्राप्त करें।

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Author: Bharat Sarathi

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