युवाओं के भविष्य से कब तक खिलवाड़ करती रहेगी भाजपा सरकार: कुमारी सैलजा

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चंडीगढ़, 31 मई। सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा है कि देश की परीक्षा प्रणाली लगातार अव्यवस्था और विवादों का शिकार होती जा रही है। पहले नीट पेपर लीक, फिर एसएससी भर्ती प्रक्रिया में अव्यवस्था, उसके बाद सीबीएसई से जुड़े गंभीर सवाल और अब सीयूईटी परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के लाखों युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन भाजपा सरकार की नाकामी के कारण उनकी मेहनत और भविष्य दोनों दांव पर लग जाते हैं। हर बड़ी परीक्षा के बाद विवाद सामने आना इस बात का प्रमाण है कि सरकार परीक्षा और भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। सांसद ने प्रश्न उठाया कि आखिर शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री देश के युवाओं के भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं? जब एक के बाद एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं विवादों और अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही हैं, तब इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? सरकार में कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार क्यों नहीं है?

कुमारी सैलजा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार युवाओं के साथ निरंतर न केवल भेदभाव कर रही है, बल्कि उनके जीवन और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। बेरोजगारी पहले से ही युवाओं के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, और ऊपर से भर्ती परीक्षाओं तथा प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़िया उनकी उम्मीदों को तोडऩे का काम कर रही हैं।

सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। देश के लाखों छात्र और उनके परिवार आखिर कब तक भाजपा सरकार की नाकामियों की कीमत चुकाते रहेंगे?

परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और जिम्मेदारी के अभाव

कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार अब प्रश्नपत्रों को हेलीकॉप्टरों और बुलेटप्रूफ वाहनों से पहुंचाने की बातें कर रही है, लेकिन देश का युवा जानना चाहता है कि आखिर हर परीक्षा के बाद विवाद क्यों खड़े हो रहे हैं? असली समस्या प्रश्नपत्रों के परिवहन की नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और जिम्मेदारी के अभाव की है।

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Author: Bharat Sarathi

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