मानसून से पहले नाला सफाई पर कांग्रेस का हमला, “करोड़ों खर्च के बावजूद शहर हर साल डूबता है”

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-नाला सफाई पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, “कागजों में होती है सफाई, बारिश में डूबता है शहर”

-बरसात से पहले करोड़ों खर्च के बावजूद जलभराव से नहीं मिल रही राहत

-जियो-टैगिंग फोटो सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग

गुरुग्राम। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने शहर में बरसाती नालों की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नाला सफाई के नाम पर वर्षों से केवल दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानसून दस्तक देने वाला है, लेकिन शहर के नालों से अब भी मिट्टी, गाद और गंदगी के बड़े-बड़े ढेर निकल रहे हैं, जिससे साफ है कि इनकी वर्षों से ठीक तरीके से सफाई नहीं हुई।

पंकज डावर ने कहा कि हर साल बरसात से पहले नालों की सफाई के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया जाता है। बैठकों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। नतीजा यह होता है कि हल्की बारिश में ही शहर जलभराव की चपेट में आ जाता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री गुरुग्राम ग्रीवेंस कमेटी के अध्यक्ष हैं, लेकिन उन्होंने कभी शहर की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास नहीं किया। मीडिया और सोशल मीडिया में हर मानसून के दौरान जलभराव की खबरें प्रमुखता से सामने आती हैं, बावजूद इसके सरकार ने कभी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। डावर ने आरोप लगाया कि सरकार के कुछ मंत्री तो मीडिया पर ही गलत खबरें दिखाने का आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि विभाग हर साल कागजों में नालों की सफाई पूरी दिखा देते हैं, जबकि अब जब नालों को खोला जा रहा है तो उनमें से भारी मात्रा में मिट्टी और गंदगी निकल रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि लंबे समय से वास्तविक सफाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि शहर के भीतरी इलाकों और गली-मोहल्लों में स्थिति और भी खराब है, जहां नाले पूरी तरह गाद और कचरे से भरे पड़े हैं। बारिश के दौरान यही गंदा पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है।

“करोड़ों खर्च, फिर भी जलभराव”

पंकज डावर ने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में नालों की नियमित सफाई होती है तो हर मानसून में शहर जलमग्न क्यों हो जाता है। उन्होंने इसे जनता के पैसे की सीधी बर्बादी बताते हुए कहा कि लोगों को जलभराव के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी झेलना पड़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कभी भी नाला सफाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं की। बैठकों में लक्ष्य तय किए जाते हैं, लेकिन यह नहीं देखा जाता कि काम वास्तव में हुआ या नहीं। जवाबदेही तय न होने की वजह से हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है।

पंकज डावर ने मांग की कि नालों की सफाई कराने वाले विभागों और एजेंसियों को सफाई से पहले और बाद की जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नाले साफ नहीं मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल दिखावे की बजाय वास्तविक सफाई कार्य सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि मानसून के दौरान लोगों को राहत मिल सके।

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Author: Bharat Sarathi

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