नौतपा में ओलावृष्टि को बताया प्रकृति की चेतावनी
बिगड़ते पर्यावरण और अवैध खनन पर जताई गहरी चिंता
असमय मौसम बदलाव को भविष्य के लिए खतरनाक संकेत बताया
रेवाडी, 30 मई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल, हरियाणा तथा राजस्थान से सटे क्षेत्रों में नौतपा के दौरान ओलावृष्टि और अचानक मौसम में आए बदलाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे बिगड़ते पर्यावरण और प्रकृति के साथ लगातार किए जा रहे खिलवाड़ का दुष्परिणाम बताया।
विद्रोही ने कहा कि नौतपा के दिनों में जहां धरती को तपना चाहिए, वहीं इस समय ओले गिरना और मौसम का शिमला जैसी ठंड में बदल जाना भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं। यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने नौतपा के दौरान ओलावृष्टि कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पर्यावरण और प्रकृति के साथ इसी तरह छेड़छाड़ जारी रही तो आने वाला समय बेहद भयावह हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सभी ऋतुएं अपने निर्धारित समय और स्वभाव के अनुसार कार्य करें। यदि गर्मी में सर्दी, सर्दी में गर्मी, मानसून में सूखा और बसंत में पेड़-पौधों व फसलों का स्वाभाविक विकास प्रभावित होगा तो पर्यावरणीय संतुलन कायम नहीं रह सकेगा।
विद्रोही ने कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ों पर अत्यधिक खनन तथा हिमालयी क्षेत्रों में विकास के नाम पर प्रकृति के दोहन से परिस्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं। असमय वर्षा, बाढ़, बादल फटना, ग्लेशियर पिघलना और मौसम का असामान्य व्यवहार इसी पर्यावरणीय संकट के संकेत हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इन संकेतों को समझकर पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो परिस्थितियां मानव नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में वन क्षेत्र लगातार घट रहा है। सरकारी दावों के बावजूद वास्तविकता यह है कि प्रदेश में वास्तविक वन क्षेत्र जमीन पर लगभग 3 प्रतिशत ही बचा है। उन्होंने अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में यह इलाका रेगिस्तान में बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वन क्षेत्र बढ़ाना, नए पेड़ लगाना, हरियाली को बचाना तथा अरावली क्षेत्र में खनन पर प्रभावी नियंत्रण बेहद आवश्यक है। अन्यथा भविष्य में पर्यावरणीय परिस्थितियां और अधिक भयावह हो जाएंगी।








