कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने में देरी अन्यायपूर्ण : वेदप्रकाश विद्रोही

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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के बाद भी भाजपा सरकार पात्र कर्मचारियों को नहीं कर रही पक्का

रेवाडी, 28 मई 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार की ओर से बनाई गई कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की नीति को कानून सम्मत ठहराने के बावजूद हरियाणा सरकार द्वारा पात्र कर्मचारियों को अभी तक नियमित न किए जाने पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे भाजपा सरकार द्वारा कच्चे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया।

विद्रोही ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मदन सिंह बनाम हरियाणा सरकार मामले में वर्ष 2014 की नीति को वैध माना है। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी पहले बिजली विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटरों तथा अब 12,700 गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के आदेश दे चुका है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा गेस्ट टीचर्स को नियमित करने और बकाया एरियर देने का आदेश प्रदेश के अन्य पात्र कच्चे कर्मचारियों के लिए भी राहत का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया कि सरकार यह पूर्वाग्रह छोड़ दे कि कच्चे कर्मचारी कांग्रेस या इनेलो शासनकाल में नियुक्त हुए थे। उन्होंने कहा कि ये सभी कर्मचारी हरियाणा के निवासी हैं और सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के फैसलों के अनुसार नियमित होने के पात्र हैं। फिर उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि भाजपा सरकार अदालतों के फैसलों का सम्मान करते हुए विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग सवा लाख कच्चे कर्मचारियों को वर्ष 2014 की नीति के तहत नियमित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे।

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Author: Bharat Sarathi

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