तीन माह में दूसरी बार बढ़े टोल शुल्क पर ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने सरकार पर जनता की जेब काटने का आरोप लगाया।
ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने टोल प्लाजाओं को बताया ‘लूट के अड्डे’, तत्काल बंद करने की मांग की

रेवाडी, 16 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने 16 जुलाई से विभिन्न टोल प्लाजाओं पर प्रति वाहन 5 से 30 रुपये तक बढ़ाए गए टोल टैक्स की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “जजिया कर” की संज्ञा दी है।
विद्रोही ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से ही देशभर में टोल दरों में बढ़ोतरी की गई थी, जिसके चलते हरियाणा में वाहन चालकों पर प्रति चक्कर 5 से 50 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ डाला गया था। अब मात्र तीन माह बाद फिर से 5 से 30 रुपये प्रति वाहन प्रति चक्कर की वृद्धि सड़क उपयोगकर्ताओं की जेब पर खुला डाका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ शासन के दौरान हर वर्ष टोल दरें बढ़ाने की गलत परंपरा शुरू कर दी गई है। टोल वसूली के बावजूद सड़कों की अपेक्षित मरम्मत नहीं होती और न ही यात्रियों के लिए शौचालय, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त प्रबंध किया जाता है। दुर्घटनाओं की स्थिति में तत्काल एम्बुलेंस सेवा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होतीं, जिससे दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति और वाहन अक्सर भगवान भरोसे रह जाते हैं।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि पिछले दस वर्षों तक साल में एक बार टोल दरों में वृद्धि होती थी, लेकिन अब एक ही वर्ष में तीन महीने के अंतराल पर दूसरी बार टोल बढ़ाकर सरकार ने लोगों की जेब काटने की हद कर दी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वाहन खरीदते समय पंजीकरण के दौरान एकमुश्त रोड टैक्स पहले ही वसूला जाता है, तो फिर सड़कों पर जगह-जगह टोल टैक्स लगाकर अतिरिक्त वसूली किस आधार पर की जा रही है। उनके अनुसार यह सरकारी स्तर पर की जा रही खुली लूट है और टोल टैक्स अब जजिया कर का रूप ले चुका है।
विद्रोही ने सरकार से यह भी पूछा कि वाहन चालकों से वसूला जा रहा भारी-भरकम टोल आखिर खर्च कहां किया जा रहा है, क्योंकि वसूली की तुलना में सड़कों के रखरखाव और नागरिक सुविधाओं पर उसका बहुत कम हिस्सा खर्च होता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों को हाईवे और एक्सप्रेस-वे बताकर भारी टोल वसूला जाता है, उनकी निर्माण गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही उनमें गड्ढे पड़ जाते हैं और लंबे समय तक मरम्मत भी नहीं होती।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर के अनेक टोल प्लाजाओं के ठेके भाजपा और संघ से जुड़े लोगों को दिए गए हैं और सत्ता के प्रभाव का उपयोग कर जनता से वसूले गए धन से राजनीतिक हित साधे जा रहे हैं। उनके अनुसार टोल प्लाजा अब “लूट के अड्डे” बन चुके हैं।
वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि वाहन चालकों के लिए आर्थिक बोझ बन चुके सभी टोल प्लाजाओं को तत्काल बंद किया जाए तथा पूर्व की व्यवस्था की तरह एकमुश्त कर प्रणाली लागू कर बार-बार टोल वसूली के इस खेल को समाप्त किया जाए।








