21 मई चाय दिवस पर विशेष : … तो हो जाय, एक कप चाय !

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डॉ घनश्याम बादल

कोई खुशी का अवसर है- “चलो चाय पीते हैं”, तनाव बढ़ गया है- “चलो चाय पीते हैं” काम में बहुत बिजी हैं- “चलो चाय तो पी ही लेते हैं’ और खाली बैठे हैं तो क्या करें – “एक कप चाय हो जाए!” ।  आपस में बात करने का बहाना ढूंढना हो तो फिर एक कप चाय पर जाइए या किसी को बुलाएं, इससे बेहतर विकल्प शायद ही मिले।  तो कह सकते हैं कि चाय का हम भारतीयों के जीवन में बड़ा  महत्व है और आज यानी 21 मई को जब सारी दुनिया मना रही है चाय दिवस तो जानते हैं चाय के उद्भव, विकास और जीवन के हर पहलू में घुस जाने की रोचक गाथा। 

 21 मई  केवल एक पेय पदार्थ के सम्मान का दिन नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों के श्रम, संस्कृति और जीवनशैली का उत्सव भी है जिनके जीवन में चाय गहराई से रची-बसी है। आज चाय केवल एक पेय नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक संवाद, आत्मीयता, अतिथि-सत्कार और दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। 

   भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में सुबह की शुरुआत चाय से होती है और दिनभर की थकान भी एक प्याली चाय दूर कर देती है।

चाय का इतिहास और उत्पत्ति

चाय का इतिहास लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना  है। इसकी खोज चीन में 2737 ईसा पूर्व हुई । कहते हैं कि चीन के सम्राट शेन नुंग के सामने उबलते पानी में  कुछ पत्तियाँ गिर गईं, जिससे पानी का रंग और स्वाद बदल गया। सम्राट को यह पेय इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे इसका उपयोग बढ़ने लगा बाद में यह पत्तियां ही चीन में ‘चा’  और ‘ते’ के नाम से जानी गई। कथा इसे बोधिसत्व की आंखों की पलकों से भी जोड़ती है।

बाद में यही चाय चीन से जापान, कोरिया होती हुई यूरोप तक पहुँची। 17वीं शताब्दी में अंग्रेज व्यापारियों ने चाय को ‘टी’ बनाकर यूरोप में लोकप्रिय बनाया। अरबी में यह ‘शाय’ कहलाई तो पंजाबी में ‘चाह’ तमिल में ‘थेनीर कन्नड़ में ‘चाहा’ बन गई। कुल मिलाकर अलग-अलग नाम से दुनिया भर में चाय ने आज  धूम मचा रखी है। 

भारत में अंग्रेजों ने असम और दार्जिलिंग के क्षेत्रों में चाय के बागान स्थापित कर भारत को चाय प्रेमी और प्रमुख उत्पादक देश बना दिया। 

आज भारत, चीन, श्रीलंका और केन्या विश्व के बड़े चाय उत्पादक देश हैं। भारत की असम, दार्जिलिंग और नीलगिरि चाय विश्वभर में अपनी विशेष सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।

चाय का प्रसार और लोकप्रियता

धीरे-धीरेचाय लोगों की संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा बनती चली गई। भारत में रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, कार्यालयों, खेतों और घरों में चाय हर जगह दिखाई देती है। “चाय पर चर्चा” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक जीवन की सच्चाई है।गाँवों में मेहमानों के स्वागत से लेकर शहरों में कार्यालयी बैठकों तक, चाय आत्मीयता का प्रतीक बन चुकी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक, हर वर्ग के लोग चाय से जुड़े हैं। लाखों मजदूर, किसान और छोटे व्यापारी चाय उद्योग से रोजगार प्राप्त करते हैं।

    जहां भारत में शक्कर, दूध व पानी के मिश्रण से बनी चाय सबसे प्रसिद्ध है वहीं काली चाय, हरी चाय, हर्बल चाय, मसाला चाय, लेमन टी आदि बदलती जीवनशैली के साथ चाय ने  अपने अनेक रूप विकसित कर लिए हैं। विदेश में अमूमन चाय की पत्तियां पानी में एक बार उबालकर ही पी जाती है। 

आम आदमी और चाय :

भारत जैसे देश में चाय आम आदमी की ऊर्जा और ताजगी का साधन है। दिनभर मेहनत करने वाले मजदूर के लिए चाय थकान मिटाने का माध्यम है, तो विद्यार्थियों के लिए देर रात तक पढ़ाई में जागने का सहारा। कार्यालयों में काम के बीच चाय का छोटा-सा विराम मानसिक तनाव को कम करता है। चाय सामाजिक संबंधों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परिवार के सदस्य सुबह एक साथ बैठकर चाय पीते हैं, मित्र मंडली चाय की दुकान पर मिलती है और कई बार महत्वपूर्ण सामाजिक एवं राजनीतिक चर्चाएँ भी चाय के साथ ही शुरू होती हैं।भारत में “एक कप चाय” कई बार रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन जाती है। अतिथि के स्वागत में चाय देना सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है।

चाय के लाभ

चाय केवल स्वाद ही नहीं देती, बल्कि सीमित मात्रा में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।चाय में कैफीन की मात्रा होती है जो शरीर और मस्तिष्क को सक्रिय बनाती है। इससे थकान कम होती है और व्यक्ति तरोताजा महसूस करता है। चाय पीने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। विद्यार्थी और कामकाजी लोग अक्सर मानसिक सतर्कता बनाए रखने के लिए चाय का सेवन करते हैं।

 ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को कई रोगों से बचाने में सहायक माने जाते हैं। अदरक, इलायची और तुलसी वाली चाय पाचन को बेहतर बनाने तथा सर्दी-जुकाम में राहत देने में उपयोगी मानी जाती है।मित्रों और परिवार के साथ बैठकर चाय पीना मानसिक तनाव को कम करने और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में सहायक होता है।

चाय की हानियाँ

जहाँ संतुलित मात्रा में चाय लाभदायक हो सकती है, वहीं अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुँचा सकता है। अधिक चाय पीने से नींद प्रभावित हो सकती है क्योंकि इसमें कैफीन होता है। खाली पेट या अत्यधिक चाय पीने से एसिडिटी और गैस की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ज्यादा चाय पीने की आदत व्यक्ति को इसकी एडिक्ट बना सकती है। कई लोगों को बार-बार चाय न मिलने पर सिरदर्द या चिड़चिड़ापन महसूस होता है। भारत में अधिकतर लोग मीठी चाय पीते हैं। ज्यादा चीनी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और मधुमेह जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।अत्यधिक चाय शरीर में आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकती है, जिससे कमजोरी या एनीमिया की समस्या बढ़ सकती है।

   इसलिए बेहतर हो कि चाय का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए। हर्बल और कम चीनी वाली चाय की ओर लोगों का झुकाव बढ़ रहा है, जो स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

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Author: Bharat Sarathi

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