राजेश श्रीवास्तव

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 के पेपर रद्द होने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी निराशा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी National Testing Agency की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। विपक्ष जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान से इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से अब तक नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने जैसी कोई पहल दिखाई नहीं दी।
लेख में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था में जवाबदेही लगभग समाप्त हो चुकी है। पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वह चर्चित बयान भी याद दिलाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते।” आज की परिस्थितियों में यह कथन राजनीतिक व्यंग्य की तरह दिखाई देता है, क्योंकि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के बावजूद किसी बड़े स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हो सकी।
नीट यूजी-2026 का मामला कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में भर्ती परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2019 से जून 2024 तक कम से कम 65 बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए या अनियमितताओं के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। इनमें सेना भर्ती परीक्षा, सीटीईटी, जेईई मेन्स और नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं भी शामिल रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में सबसे अधिक 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। इसके अलावा 2019 में 9, 2020 में 12, 2022 में 11 और 2023 में 12 मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाला। सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में सामने आए, जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में भी कई बड़े घोटाले उजागर हुए।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन वर्ष 2017 में उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश परीक्षाओं को पारदर्शी और दक्षतापूर्वक संचालित करने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन समय के साथ एजेंसी की छवि लगातार विवादों में घिरती चली गई। आलोचकों का कहना है कि अब एनटीए को लोग व्यंग्य में “नेवर ट्रस्ट एजेंसी” तक कहने लगे हैं।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 से 2024 के बीच एनटीए कम से कम 16 बड़ी परीक्षाओं को स्थगित या रद्द कर चुका है। इनमें कुछ परीक्षाएं कोविड महामारी या तकनीकी कारणों से प्रभावित हुईं, लेकिन हाल के वर्षों में पेपर लीक और सुरक्षा चूक सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई।
नीट यूजी-2024 मामले में बिहार और झारखंड से पेपर लीक के आरोप सामने आए थे, जहां प्रश्नपत्रों की तस्वीरें व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से प्रसारित किए जाने की बात जांच में सामने आई। कई आरोपियों ने लाखों रुपये लेकर पेपर उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की थी। अब 2026 में भी उसी तरह के आरोप सामने आना यह दर्शाता है कि परीक्षा सुरक्षा तंत्र में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 में एनटीए ने केवल 29 परीक्षाएं आयोजित कीं, जो 2019 के बाद सबसे कम थीं। परीक्षार्थियों की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। आलोचकों का मानना है कि एजेंसी की विफलता केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी खामियां, प्रशासनिक अव्यवस्था और पारदर्शिता की कमी भी इसकी बड़ी समस्याएं हैं।
आज स्थिति यह है कि करोड़ों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों खपा देते हैं, लेकिन जब पेपर लीक होते हैं या परीक्षाएं रद्द होती हैं तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों का होता है। बार-बार होने वाली इन घटनाओं ने युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।








