19 से 29 मई तक रीचेकिंग, फोटोकॉपी और पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन
डिजिटल युग में शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बचाने की सबसे बड़ी परीक्षा
– एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया। वर्तमान डिजिटल और तकनीक आधारित दौर में शिक्षा व्यवस्था तेजी से आधुनिक हो रही है। ऑनलाइन परीक्षा, डिजिटल मूल्यांकन, क्लाउड डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने शिक्षा को अधिक सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसी के साथ पेपर लीक, मूल्यांकन अनियमितताओं और परीक्षा माफियाओं का बढ़ता नेटवर्क शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
हाल के वर्षों में नीट सहित कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल तकनीकी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता भी उतनी ही आवश्यक है। ऐसे माहौल में सीबीएसई द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के बाद उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी, अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना छात्र हित में महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

सीबीएसई के अनुसार छात्र 19 मई से 22 मई 2026 तक उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 26 मई से 29 मई 2026 तक अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया होगी। इससे छात्रों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि कहीं उत्तर जांचने में त्रुटि, टोटलिंग में गलती या कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं रह गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में केवल परीक्षा आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिणामों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। एक अंक की त्रुटि छात्र के कॉलेज प्रवेश, मेरिट और करियर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए पुनर्मूल्यांकन और रीचेकिंग जैसी व्यवस्थाएं छात्रों के अकादमिक अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं।
नीट यूजी पेपर लीक प्रकरण में कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी ने यह भी उजागर किया कि परीक्षा प्रक्रिया के भीतर मौजूद भ्रष्ट नेटवर्क किस तरह पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि अब शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल एन्क्रिप्शन, बायोमेट्रिक सत्यापन, लाइव मॉनिटरिंग और एआई आधारित निगरानी प्रणाली की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
आज शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता की आधारशिला है। यदि परीक्षा प्रणाली पर से भरोसा कमजोर होता है तो प्रतिभा आधारित व्यवस्था भी प्रभावित होती है। इसलिए पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी और मूल्यांकन अनियमितताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई समय की सबसे बड़ी मांग बन चुकी है।
कहा जा सकता है कि डिजिटल युग शिक्षा के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक ओर तकनीक पारदर्शिता और सुविधा बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा सुरक्षा और साइबर अपराध नई चुनौतियां बनकर उभर रहे हैं। सीबीएसई की नई पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी संभव है जब पूरी परीक्षा प्रणाली में ईमानदारी, पारदर्शिता और कठोर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शिक्षा राष्ट्र निर्माण की आत्मा है और उसकी विश्वसनीयता बनाए रखना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र








