सी-2+50% फार्मूले पर एमएसपी तय करने की उठी मांग
धान पर 802 रुपये और कपास पर 2387 रुपये प्रति क्विंटल घाटे का दावा
अमेरिकी दबाव में कृषि नीतियां चलाने का केंद्र सरकार पर आरोप
मौजूदा एमएसपी से किसान कर्ज और संकट में और फंसेंगे : किसान सभा
चंडीगढ़, 16 मई 2025 – अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा राज्य कमेटी के नेता सरबत सिंह पूनिया ने आगामी खरीफ फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को अपर्याप्त बताते हुए इसे केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ एक और विश्वासघात करार दिया है। उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) को रबी और खरीफ फसलों की बुवाई से पहले एमएसपी की घोषणा करनी होती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था किसानों की वास्तविक लागत को नजरअंदाज करती है।
पूनिया ने कहा कि एमएसपी का निर्धारण फसलों की कुल उत्पादन लागत के आधार पर होना चाहिए, लेकिन कृषि मूल्य एवं लागत आयोग का तरीका दोषपूर्ण है क्योंकि इसमें किसानों के सभी खर्च शामिल नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की प्रमुख मांग रही है कि एमएसपी का निर्धारण सी-2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर किया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया। इसके चलते किसानों को हर फसल पर घाटा उठाना पड़ रहा है और वे लगातार कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खरीफ की प्रमुख फसल धान का एमएसपी 2441 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जबकि इसका वास्तविक मूल्य 3243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। इस प्रकार किसानों को प्रति क्विंटल 802 रुपये का घाटा झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी खरीद नहीं हुई तो किसानों की स्थिति और अधिक खराब होगी।
इसी प्रकार कपास का एमएसपी 8267 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि यह 10624 रुपये होना चाहिए था। इससे कपास उत्पादकों को प्रति क्विंटल 2387 रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि पहले से संकट झेल रहे कपास किसानों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। पूनिया ने कहा कि मक्का, बाजरा और दालों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुक्त व्यापार समझौतों के तहत अमेरिका का दबाव रहता है कि भारत कृषि सब्सिडी घटाए और एमएसपी कम रखे ताकि अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में लाभकारी कीमतों पर बिक सकें। उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के विचार भी इसी दिशा में दिखाई देते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत की कृषि नीतियां अमेरिकी दबाव में संचालित हो रही हैं।
किसान सभा ने मांग की है कि सभी फसलों का एमएसपी सी-2 प्लस 50 प्रतिशत के फार्मूले पर तय किया जाए तथा वर्तमान महंगाई और ऊंची मुद्रास्फीति को देखते हुए अभी घोषित खरीफ फसलों के समर्थन मूल्यों में तत्काल वृद्धि की जाए।









