फरीदाबाद/गुड़गांव, 14 अप्रैल 2026। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एकसमान न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग को लेकर मजदूर संगठनों ने आवाज तेज कर दी है। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने 23196 रुपये न्यूनतम वेतन निर्धारित करने, हरियाणा सरकार द्वारा घोषित वेतन को सख्ती से लागू कराने तथा मानेसर आंदोलन में गिरफ्तार मजदूरों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई है।

सीटू हरियाणा के प्रदेश महासचिव जय भगवान और उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार और प्रशासन का रवैया मजदूरों की स्थिति सुधारने के बजाय दमनकारी रहा है। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर 2025 को हुई कमेटी की बैठक में 23196 रुपये न्यूनतम वेतन पर सर्वसम्मति बनी थी, जिसमें फैक्ट्री मालिकों के संगठन, ट्रेड यूनियन, सरकार और श्रम विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे।
नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा 15220 रुपये न्यूनतम वेतन की घोषणा भी मजदूर आंदोलनों के दबाव में की गई, लेकिन उद्योग मालिक इसे लागू करने से कतरा रहे हैं। फरीदाबाद, गुरुग्राम, पानीपत, कुंडली और बहादुरगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों द्वारा स्वतःस्फूर्त हड़तालें इसी असंतोष का परिणाम हैं।
सीटू नेताओं ने कहा कि प्रशासन द्वारा आंदोलन को बदनाम करने के लिए “बाहरी तत्वों” का आरोप लगाया जा रहा है, जो गलत है। उन्होंने मांग की कि मानेसर आंदोलन में गिरफ्तार सभी मजदूरों को तुरंत रिहा किया जाए।
उन्होंने बताया कि एनसीआर में चार राज्यों—हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान—के कुल 23 जिले शामिल हैं, जहां न्यूनतम वेतन में भारी असमानता है। दिल्ली में 19846 रुपये, हरियाणा में 15220 रुपये, उत्तर प्रदेश में 11313 रुपये और राजस्थान में 7410 रुपये न्यूनतम वेतन है, जबकि जीवन-यापन का खर्च लगभग समान है।
सीटू का तर्क है कि जब एनसीआर के लिए केंद्र सरकार की एकीकृत योजना लागू है और औद्योगिक गतिविधियां पूरे क्षेत्र में समान रूप से फैली हैं, तो न्यूनतम वेतन भी एकसमान होना चाहिए, जो किसी भी स्थिति में 23196 रुपये से कम न हो।
संगठन ने सभी मजदूरों से आह्वान किया है कि वे 16 अप्रैल को अपने-अपने जिलों के उपायुक्त (डीसी) कार्यालयों पर पहुंचकर इन मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन करें और अपनी आवाज बुलंद करें।








