गुडग़ांव में 100 करोड़ खर्च का दावा फिर भी प्रदूषित शहरों में गिनती: राज बब्बर

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-यातायात अव्यवस्था, जलभराव को लेकर पूर्व सांसद ने उठाए सवाल

गुडग़ांव। पूर्व सांसद राज बब्बर में गुडग़ांव में सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये खर्च करने के दावों पर कहा कि 100 करोड़ खर्च के बाद भी गुडग़ांव की गिनती प्रदूषित शहर में हो रही है। यहां हर मॉनसून में जलभराव होता है। सडक़ेें टूटी रहती हैं। नालों की सफाई नहीं होती। जलभराव नहीं होने देने के दावे किए जाते हैं। इन सबके बीच शहर की हालत पहले से भी बदतर नजर आती है। यह बात उन्होंने मंगलवार को यहां कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कही। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर सहित कई नेता, कार्यकर्ता मौजूद रहे।

राज बब्बर ने कहा कि सरकार ने गुडग़ांव में 100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, इसकी उन्हें खुशी है। यह रकम कहां पर खर्च हुई, सरकार की यह भी जवाबदेही होनी चाहिए। क्योंकि ना तो गुडग़ांव की जनता को यह पता चल रहा कि 100 करोड़ कहां खर्च हुए और ना कोई इतनी बड़ी सुविधा मिली है जिससे समझा जा सके कि इतनी बड़ी रकम खर्च हो गई। उन्होंने कहा कि गुडग़ांव हिंदुस्तान का सबसे प्रदूषित शहर हो गया है। दुनियाभर में यह शहर प्रदूषण की दिशा में आगे ही है। लगातार यहां ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है। यहां 100 करोड़ के फ्लैट लेकर लोग रह रहे हैं। क्या वे इतनी बड़ी रकम खर्च करके प्रदूषण खरीद रहे हैं। ऐसे ही हालत रहे तो हमारी आने वाली पीढिय़ों का क्या होगा। कैसे वे सेहतमंद रह पाएंगें। राज बब्बर ने कहा कि आने वाली पीढिय़ों को कैसा भविष्य और वातावरण दे रहे हैं, इस पर सरकार को सोचना चाहिए। दावों और वादों से कुछ नहीं होता, धरातल पर काम करके दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि वे सरकार का विरोध नहीं कर रहे, मगर जनता की तकलीफ को उठाना उनकी जिम्मेदारी है। इसके समाधान की मांग सरकार से करना विपक्ष की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बरसात को लेकर मुंबई का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर चार महीने तक बरसात होती है, मगर वहां पर शहर बंद नहीं होता। गुडग़ांव में तो हालात उलटे हैं। यहां पर हल्की बरसात में ही जाम लग जाता है। इसका मतलब है कि यहां सही नीयत से काम नहीं हो रहा। बरसात के पानी की निकासी के लिए मेवात तक नहर बना दी जानी चाहिए। मुंबई एक्सप्रेसवे बनाते समय जो साथ में मिट्टी निकालने से गड्ढे हुए थे, उनमें यह नजर बनाकर पानी को मेवात पहुंचाया जा सकता था। शहर में सीवरेज की लाइनों के साथ में नई लाइन डालकर उन्हें जोड़ दिया जाए तो पानी का दबाव कम होगा और बरसाती पानी की निकासी भी आसान हो जाएगी। यह सब काम करने के लिए सही नियत की जरूरत होती है, जो कि सरकार और अधिकारियों की नहीं है। उन्होंने बुल्डोजर से गरीबों के आशियाने ढहाने को लेकर कहा कि बुल्डोजर ना चलाया जाए। लोगों के रहन-सहन का प्रबंध किया जाए। पूर्व सांसद राज बब्बर ने कहा कि कोरोना के समय थाली बजवाई थी, मगर अब उस थाली में रोटी चाहिए। महंगाई इतनी बढ़ा दी गई है कि थाली में रोटी मयस्सर नहीं हो रही।

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Author: Bharat Sarathi

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