कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार करने का आरोप, 7,956 रुपये मासिक अंतर पर उठे सवाल
रेवाडी/गुरुग्राम, 12 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार पर मजदूरों, कामगारों और श्रमिकों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरकार अपनी ही गठित कमेटी की सिफारिशों को लागू करते हुए न्यूनतम मासिक वेतन 23,196 रुपये निर्धारित करे।
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा में परंपरागत रूप से हर पांच वर्ष में सरकार द्वारा गठित कमेटी की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी तय की जाती रही है। लेकिन भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस परंपरा को लगातार नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में न्यूनतम मासिक वेतन 11,274 रुपये तय किया गया था, जो 2025 तक बिना किसी वृद्धि के जारी रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि नियमानुसार वर्ष 2020 में मजदूरी बढ़ाई जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। यहां तक कि 2025 में भी मजदूरी में कोई संशोधन नहीं किया गया, जिससे श्रमिक वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
विद्रोही के अनुसार, श्रमिक संगठनों के दबाव के बाद वर्ष 2024 में सरकार ने श्रम विभाग, ट्रेड यूनियनों और उद्योग प्रतिनिधियों की संयुक्त कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने 9 बैठकों के बाद 29 दिसंबर 2025 को पानीपत में सर्वसम्मति से सिफारिश की कि न्यूनतम मासिक वेतन 23,196 रुपये होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार कर गजट नोटिफिकेशन जारी करती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने अपनी ही कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार कर न्यूनतम वेतन 15,220 रुपये तय कर दिया।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि सरकार ने मजदूरों के हितों की अनदेखी कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कमेटी की सिफारिश और सरकार द्वारा तय वेतन में लगभग 7,956 रुपये का अंतर है, जो श्रमिकों के साथ सीधा अन्याय है।
उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सरकार आमजन की बजाय पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। विद्रोही ने मुख्यमंत्री से मांग की कि तुरंत प्रभाव से कमेटी की सिफारिश लागू कर श्रमिकों को उनका न्यायसंगत वेतन दिया जाए।









