चंडीगढ़, 11 अप्रैल – हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा के सभी सरकारी अस्पतालों के व्यापक सुधार के आदेश दिए हैं। इसके तहत जिला अस्पतालों से लेकर राज्य के दूर-दराज के कोने में स्थित अंतिम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक स्वास्थ्य प्रणाली के हर स्तर पर निर्देश जारी किए गए हैं। संदेश साफ़ है- सख्ती से पालन और समय पर सुधार ज़रूरी हैं, ऑप्शनल नहीं।
डॉ. मिश्रा ने सभी जिला उपायुक्त, सिविल सर्जन, सरकारी मेडिकल कॉलेज के निदेशक और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को भेजे एक पत्र में कहा है कि लापरवाही, देरी या टालमटोल करने पर तुरंत प्रशासनिक एक्शन लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सुधार की पहल के तहत, 13 अप्रैल से सभी सरकारी अस्पतालों में एक हफ़्ते का सफ़ाई अभियान शुरू किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अस्पताल परिसर, जिसमें वार्ड, कॉरिडोर, पार्क और आस-पास के इलाके शामिल हैं, की अच्छी तरह से सफ़ाई करें, साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट का सही मैनेजमेंट भी करें। पारदर्शिता और निगरानी करने के लिए तय अधिकारियों को सफाई की एक्टिविटी के फोटोग्राफिक सबूत देने होंगे, जिससे रियल-टाइम अकाउंटेबिलिटी का सिस्टम मज़बूत होगा।
उन्होंने कहा कि प्रोफेशनलिज्म और मरीज़ों का भरोसा बढ़ाने के लिए अस्पताल के सभी स्टाफ़-मेडिकल, पैरामेडिकल और प्रशासनिक को ड्यूटी के दौरान तय यूनिफ़ॉर्म पहनने और पहचान और पद साफ़-साफ़ दिखाने का निर्देश दिया गया है। इस कदम से मरीज़ों के साथ बातचीत और संस्थागत अनुशासन में सुधार होने की उम्मीद है।
सरकार ने मरीज़ों के अनुभव को बेहतर बनाने पर बहुत ज़ोर दिया है। अस्पतालों को यह पक्का करना चाहिए कि मरीज़ों और उनके अटेंडेंट के लिए साफ़ टॉयलेट, पीने का साफ़ पानी, साफ़ बिस्तर और बैठने की सही व्यवस्था जैसी ज़रूरी सुविधाएँ मौजूद हों।
इसके अलावा, संस्थागत को प्रभावी क्यू मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए मरीज़ों के आने-जाने को आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इंतज़ार का समय कम करने और भीड़ कम करने के लिए जहाँ भी ज़रूरत हो, वहाँ और रजिस्ट्रेशन काउंटर और हेल्प डेस्क बनाए जाएँगे।
सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वे आयुष्मान भारत हेल्प डेस्क को बिना किसी रुकावट के काम करने दें, ताकि योग्य लाभार्थियों को बिना किसी प्रक्रिया में देरी के समय पर मदद मिल सके। इसके साथ ही, एम्बुलेंस सर्विस चौबीसों घंटे पूरी तरह चालू रहनी चाहिए और सरकार इमरजेंसी में किसी भी रुकावट के लिए ज़ीरो-टॉलरेंस अप्रोच अपनाए।
उन्होंने कहा कि मां और बच्चे की हेल्थ की अहमियत को समझते हुए, सरकार ने अस्पतालों को मैटरनिटी और बच्चों के वार्ड को अपग्रेड करने का निर्देश दिया है। लोकल संस्थाओं के साथ मिलकर, सुखदायक रंगों से दोबारा पेंट करके और बच्चों के लिए सही आर्टवर्क लगाकर, ज्यादा स्वागत करने वाला और स्ट्रेस-फ्री माहौल बनाने के लिए जगहों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बढ़ते तापमान को देखते हुए, अस्पतालों से कहा गया है कि वे मरीज़ों और विज़िटर्स के लिए साफ़ और ठंडे पीने के पानी की लगातार सप्लाई पक्का करें। अधिकारियों को लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए और ज्यादा कूलिंग इंतज़ाम और मच्छरों को कंट्रोल करने के तरीकों के लिए एनजीओ और चौरिटेबल ऑर्गनाइज़ेशन से मदद लेने के लिए भी कहा गया है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल तक आसान पहंुच और मार्गदर्शन को बेहतर बनाने के लिए, सभी जगहों पर साफ़ और दिखने वाले साइनेज लगाने होंगे। इसके अलावा, साफ़ और सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सरकारी नियमों के हिसाब से सभी कबाड़ सामान, खराब गाड़ियां और इस्तेमाल न होने वाले इक्विपमेंट को तुरंत हटा देना चाहिए।
उन्होंने समय पर मेडिकल मदद के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, सभी डायग्नोस्टिक और लैबोरेटरी सर्विस को-जिसमें कैथ लैब जैसी ज़रूरी यूनिट भी शामिल हैं-24×7 काम करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह पक्का हो सके कि मरीज़ों को तुरंत और बिना किसी रुकावट के देखभाल मिले। नियमों का पालन करवाने के लिए जिला उपायुक्त और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि वे पांच दिनों के अंदर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों का खुद निरीक्षण करें। इन निरीक्षण में साफ-सफाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस डिलीवरी शामिल होगी और रिव्यू के लिए फोटोग्राफिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।







